आखिर किस वजह से धु-धु कर जलने लगा झारखण्ड विधानसभा भवन

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वार्ता स्पेशल by सत्यम जायसवाल (संपादक)

रांची : 4 दिसंबर की रात रघुवर सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि 465 करोड़ रुपये की लागत से बनी नयी विधानसभा में आग लग गयी। सवाल यह है कि 465 करोड़ की राशि से जब इस भवन का निर्माण हो रहा था तो क्या इतने सारे पैसे सिर्फ इंटीरियर और डेकोरेशन पर खर्च कर दिए गए!
सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक आम जनता की रहने वाले मॉल और पढ़ने वाले स्कूल में भी नहीं की जाती। फिर तो ये जनप्रतिनिधियों के दवरा जनता के मुद्दों पर चर्चा किये जाने वाली भवन थी। आज के समय में भवन निर्माण के समय आग लगने से बचने के लिए एक आधुनिक व्यवस्था लगायी जाती है जिसे Pre-action fire sprinkler systems कहते हैं।

क्या है Pre-action fire sprinkler systems

Pre-action fire sprinkler systems एक ऐसा तंत्र होता है जो कार्यालय तथा भवनों में अग्नि सुरक्षा दृष्टि से लगाया जाता है। इस सिस्टम को भवन के लगे छत पर रखे पानी टंकी से जोड़ कर उसका कनेक्शन भवन के हर कमरे में किया जाता है। कमरे में एक यंत्र लगा होता है जो स्मोक डिटेक्ट करता है धुएं के सम्पर्क में आते ही इस यंत्र का वाटर ब्लॉकैग खुल जाता है और यह तेज गति से फुहारा की तरह पानी छोड़ने लगता है।

नए विधानसभा भवन में लगाया गया था Pre-action fire sprinkler systems

अग्नि सुरक्षा मानकों के दृष्टिकोण से विधानसभा भवन में भी यह यंत्र लगाया गया था। अब सवाल यह है कि इसके वाबजूद भी कैसे लगी इतनी भयानक आग?
विधानसभा भवन में Pre-action fire sprinkler systems तो लगाया गया था परन्तु भवन के छत पर मौजूद टंकी में पानी नहीं थी। साथ ही टंकी से कमरे तक आने वाले पाइप को अभी तक जोड़ा नहीं गया था। गौर करनेवाली बात यह है कि उद्घाटन से पहले कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अग्निशमन विभाग से एनओसी मांगा था। जांच के बाद अग्निशमन विभाग ने भवन को एनओसी के लायक नहीं माना था।

कंस्ट्रक्शन कंपनी को अग्निशमन विभाग से मिली थी एनओसी

कई आपत्तियां की थीं फिर इस शर्त पर एनओसी दिया था कि 11 सितंबर तक सभी तरह की आपत्तियों को दूर कर लिया जाये। कंपनी ने इस बारे में अग्निशमन विभाग को लिख कर दिया था कि वह 11 सितंबर तक सभी तरह की आपत्तियों को दूर कर देगा।