एनआरसी के राज्यसभा में पारित होते ही औंधे मुंह गिरी कांग्रेस, मुस्लिम लीग सुप्रीम कोर्ट की शरण में, कुछ राज्यों में विरोध, समर्थन में मन रहा है देश भर में जश्न

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वार्ता स्पेशल : नागरिकता संशोधन बिल(कैब) के राज्यसभा से बहुमत से पास हो जाने पर देशभर में कहीं जश्न तो कहीं विरोध का आलम है। हालांकि प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर राज्यों सहित असम में विरोध को देखते हुए ट्वीट कर कहा कि सभी के अधिकारों की रक्षा केंद्र सरकार और वह खुद करेंगे। ‘मैं असम के अपने भाइयों और बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि नागरिकता संशोधन बिल के पारित होने के बाद उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं- कोई भी आपके अधिकारों, विशिष्ट पहचान और सुंदर संस्कृति को नहीं छीन सकता है। यह फलता-फूलता और विकसित होता रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘केंद्र सरकार और मैं खंड 6 की भावना के अनुसार असमिया लोगों के राजनीतिक, भाषाई, सांस्कृतिक और भूमि अधिकारों को संवैधानिक रूप से संरक्षित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

बता दें कि कैब को संसद द्वारा मंजूरी प्रदान किए जाने के बीच इसे लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर असम के गुवाहाटी में बुधवार को अनिश्चिकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया, जबकि त्रिपुरा में असम राइफल्स के जवानों को तैनात कर दिया गया है। दूसरी और खबरों के मुताबिक नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लालुंगगांव में गोलियां चलाई। इसमें कुछ लोग कथित तौर पर घायल हो गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि प्रदर्शकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की और ईंटे फेंकी और पुलिस ने जब उन्हें शांत कराने की कोशिश की तो ये लोग वहां से नहीं हटे। अधिकारी ने गोलीबारी में घायल लोगों की संख्या नहीं बताई लेकिन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कम से कम चार लोग घायल हुए हैं। गुवाहाटी में प्रदर्शनकारी कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए इस विधेयक के विरोध में बृहस्पतिवार को सड़कों पर उतरे।गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, जोरहाट और तिनसुकिया में सेना के जवानों ने फ्लैगमार्च किया है।

सीएम के घर पर पथराव

सूत्रों के मुताबिक डिब्रूगढ़ स्थित लाखीनगर में राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के घर पर पथराव किया गया है।

पाकिस्तान से 2011 में आरती नामक हिंदू महिला भारत आई थी। अभी तक इसे भारत की नागरिकता नहीं मिली है। आरती का कहना है कि ‘मैं तो संसद और नागरिकता (संशोधन) विधेयक के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती हूं। बस इतना पता है कि यह विधेयक हमें भारत का नागरिक होने का कानूनी हक दिला सकता है।’मैं चाहती हूं कि विधेयक पास हो जाए। मेरे वश में और कुछ तो है नहीं।

नवजात बेटी का नाम रखा नागरिकता

आरती ने कहा मैने अपनी नवजात बेटी का नाम ‘नागरिकता’ रख दिया है। उम्मीद है कि ‘नागरिकता’ को भारत की नागरिकता मिल जाएगी।

दिल्ली मंजनू का टीला इलाका, जहां पाकिस्तान से आए करीब 140 परिवार रहते हैं उन्हीं में आरती भी शामिल है। उसका पहले एक बेटा है, जिसका नाम लोकेश है। आरती बताती है कि हम 2011 में तीर्थयात्रा के नाम पर वीजा लेकर भारत आए थे। आरती ने कहा सुविधाएं न हों, लेकिन अमन चैन और अपनो के बीच हैं। बेटी के जन्म के बाद कई लोगों ने कहा, अपने मुताबिक कोई नाम रख लो। तभी मुझे पता चला कि देश में हमारी नागरिकता को लेकर कुछ चल रहा है। मैंने अपने बड़ों से बातचीत की, उन्होंने विस्तार से बताया कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक का मामला संसद में है। अगर यह पास हो जाता है तो हमारे ऊपर से पाकिस्तानी होने का ठप्पा मिट जाएगा और हम गौरव से दुनिया को बता सकेंगे कि हम भारतीय हैं। बस यहीं से दिमाग में आया कि बेटी का नाम ‘नागरिकता’ रख दिया जाए। हमारी इस बस्ती में रहने वाले लोगों को जब यह पता चला तो उन्होंने हमें बधाई दी।

आरती का कहना है कि अगर पाकिस्तान में होते तो पता नहीं, यह ले भी पाती या नहीं। वह कहती हैं, मैं अपनी बेटी ‘नागरिकता’ को टीचर बनाना चाहूंगी। तीन चार साल के बाद इसका सरकारी स्कूल एडमिशन करवा दूंगी। हम भी पढ़ना चाहते थे, लेकिन पाकिस्तान में दूसरी कक्षा के बाद बहुत कुछ खत्म होने लगता है। उसी का शिकार हम भी हुए। पढ़ाई छूट गई, सामने कुछ नजर नहीं आ रहा था। मौका मिलते ही हम भारत आ गए। अब यही उम्मीद कर रहे हैं कि नागरिकता के लिए आठ साल से इंतजार किया है। हो सकता है कि अब यह इंतजार खत्म हो जाए। जो भी हो, लेकिन अब यह तय है मेरी बेटी ‘नागरिकता’, इसी देश में बड़ी होगी, पढ़ेगी लिखेगी।

दिल्ली से अहमदाबाद तक जश्न मिठाइयां बंटी

एक ओर दिल्ली से लेकर अहमदाबाद तक कई ऐसे लोग हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुआ दे रहे हैं और इस जीवन में नागरिकता संशोधन बिल को सबसे बड़ा तोहफा मान रहे हैं। ये सभी लोग नागरिकता संशोधन विधेयक के पास होने से बेहद खुश हैं। इसी खुशी में ये एक दूसरे को मिठाईयां खिला रहे हैं।

राज्यसभा से बिल के पास होने के बाद दिल्ली से लेकर भोपाल और जम्मू तक जश्न मनाया गया। खबरों के मुताबिक रात होने के बावजूद लोग सड़कों पर उतरे और खूब झूमे। अहमदाबाद, जयपुर और कोलकाता में भी लोगों ने खूब जश्न मनाया। आतिशबाजी की और ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचे और झूमे। दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।ये पाकिस्तान के वो अल्पसंख्यक हिंदू हैं जो पाकिस्तान में जुल्म और ज्यादती से परेशान होकर भारत आए थे। कई लोग ऐसे थे जो काफी वक्त से यहां रह रहे हैं लेकिन ये लोग यहां के नागरिक नहीं थे इसलिए कोई अधिकार नहीं मिला। न घर खरीद सकते हैं, न सरकारी नौकरी कर सकते हैं और न ही अच्छी शिक्षा हासिल कर सकते हैं। इन सभी लोगों ने सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल के पास होने की खुशी में मिठाइयां बांटी।

भोपाल में सिंधी समुदाय के लोगों ने भी नागरिकता संशोधन विधेयक का पुरजोर समर्थन किया। बिल पास होने पर मिठाईयां बांटकर जश्न मनाया। कुछ ऐसी ही तस्वीर जम्मू और कश्मीर में नजर आई। जम्मू में पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजियों का जश्न देखते बन रहा था। मोदी और शाह के पोस्टर के साथ सिटीजन अमेंडमेंट बिल के समर्थन में जुलुस निकाला। कोलकाता और अहमदाबाद में भी बिल के पास होने के बाद लोगों ने जश्न मनाया।

पाकिस्तान से लौटे हिंदुओं ने कहा यह पुनर्जन्म

पाकिस्तान से भागकर आए हिन्दुओं ने कहा कि ये उनके लिए पुनर्जन्म जैसा है। उनकी मन की मुराद पूरी हो गई। ये वो लोग हैं जिनमें कोई बीस सालों से यहां है कि तो कोई पचास सालों से। ये लोग पाकिस्तान में ज़ु्ल्मों से बचने के लिए आए थे लेकिन आज तक लटके रहे। अब इन्हें उम्मीद है कि वो चैन से जी सकेंगे। ये कह सकेंगे कि वो हिन्दुस्तानी हैं।

हिंदुओं की आबादी 100 करोड़ इसलिए भारत हिंदू राष्ट्र: रवि किशन

भाजपा नेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने कहा कि हिंदुओं की आबादी 100 करोड़ है तो जाहिर है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने कहा, बहुत सारे मुस्लिम और ईसाई देश हैं इसलिए यह अद्भुत है कि हमारे पास अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए ‘भारत’ नाम का एक देश है। उन्होंने आगे कहा कि यह बड़े गर्व की बात है कि 100 करोड़ हिंदुओं का एक स्थान है जिसको विश्व जानता है और आज भारत का सम्मान पूरे विश्व में है।

एक अन्य खबर के अनुसार नागरिक संशोधन बिल 2019 पास होते ही राजस्थान के हजारों परिवारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इन परिवारों ने दिसम्बर में ही दिवाली मनाई। जमकर पटाखे फोड़े और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। ये परिवार पाकिस्तान में प्रताड़नाएं सहने के बाद हिन्दुस्तान चले आए और वर्तमान राजस्थान के जोधपुर के काली बेरी एरिया, मंडोर के आस-पास रहते हैं। इन पाक विस्थापितों को वर्षों से नागरिकता का इंतजार था। अकेले राजस्थान में करीब 7 हजार पाक विस्थापित बताए जा रहे हैं।दोपहर से लगाए बैठे थे टीवी पर टकटकी बुधवार को राज्यसभा में नागरिक बिल पेश किए जाने पर पाक विस्थापित नागरिकों की धड़कने बढ़ी हुई थी।टकटकी लगाए बैठे थे। गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के पक्ष में पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी तो पाक विस्थापित नागरिकों ने वंदे मातरम के नारे लगाकर खुशी का इजहार किया। जब नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ तो पटाखे फोड़कर के खुशी मनाई।

जोधपुर में करीब 7 हजार शरणार्थी

पाक विस्थापित गोविन्द व दिनेश ने बताया कि उनके लिए आज दिवाली से ज्यादा बड़ा दिन है। पाकिस्तान से आए हुए हिंदू शरणार्थियों की संख्या की बात करें तो पूरे राजस्थान में करीब पच्चीस हजार के करीब है। अकेले जोधपुर जिले में इनकी संख्या सात हजार आस-पास है। अब भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता आसान हुआ है। हालांकि इनमें से कई परिवारों को नागरिकता मिल भी चुकी है।

पाक के अत्याचार की याद सिहर उठते हैं विस्थापित

खबरों के मुताबिक जोधपुर में पाक विस्थापित गोविन्द ने बताया पाकिस्तान में हुए अत्याचार कभी नहीं भूल पाएंगे। वहां पर रहने, काम करने और बच्चों को पढ़ाने तक की आजादी नहीं थी। जबरन मुस्लिम धर्म परिवर्तन करवाया जाता था। सबसे खौफनाक बात तो ये थी कि बेटियों को अगवा तक कर लिया जाता था। उनसे जबरन शादी कर ली जाती थी। इसलिए परिवार सहित छह साल पहले भारत आ गए और वर्तमान में जोधपुर के काली बेरी एरिया में शरण लिए हुए हैं।

लुधियाना के कुंदनपुरी इलाके में आकर बसे शम्मी सिंह और अमकीर सिंह ने बताया कि वह अफगानिकस्तान के काबुल इलाके में रहते थे।वह 2012 में हिंदुस्तान आए थे और लुधियाना के कुंदनपुरी इलाके में बसे थे। शम्मी सिंह और अमरीक सिंह बताते हैं कि वह काबुल में कपड़े का कारोबार करते थे।

काबुल में अल्पसंख्यक लोगों के साथ काफी धक्केशाही होती थी। उनके परिवारों पर काफी दबाव बनाया जाता था। महिलाएं भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं थी। उनके परिवारों को तंग किया जाता था और धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाया जाता था। उन्होंने परिवार को बचाने के लिए अफगानिस्तान को छोड़ने का फैसला कर दिया। परिवार को वहां से लेकर वह पहले पाकिस्तान गए और वहां से होते हुए भारत में आ गए। यहां वह लुधियाना के कुंदनपुरी इलाके में बस गए।अब उनका कारोबार अच्छा चल रहा है और परिवार भी पूरी तरह से सुरक्षित है। अब उन्हें यहां कोई डर नहीं है। दोनों परिवारों को सदस्यों ने कहा कि यह बिल उनकी दिवाली से कम नहीं है। वह काफी खुश है कि उन्हें भारत में नागरिकता मिल जाएगी। वह सरकार का धन्यवाद करते हैं और विरोध करने वालों से प्रार्थना करते हैं कि वह दूसरे देशों से आकर बसे लोगों की भावनाओं को समझें।

नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ मुस्लिम लीग सुप्रीम कोर्ट याचिका

इधर दूसरी ओर खबरों के मुताबिक मुस्लिम लीग ने नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में चली गई है नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दाखिल हो गई है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के चार सांसदों ने अपनी याचिका में कहा कि धर्म के आधार पर वर्गीकरण की संविधान इजाजत नहीं देता. ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, इसलिए इस विधेयक को रद्द किया जाए.इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने अपनी याचिका में कहा, ‘ नागरिकता संशोधन बिल संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत ट्वीन टेस्ट पर खरा नहीं उतरता है. धर्म के आधार पर वर्गीकरण को संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. ये विधेयक संविधान में वर्णित सेक्युलरिज्म के मूल सिद्धांतों का हनन करता है.’ मुस्लिम लीग के 4 सांसदों की तरफ से याचिका दाखिल हुई है।

राजस्थान के सीएम गहलोत के बोल

सीएम गहलोत ने कहा कि लोगों की बोलने की आज़ादी खत्म हो रही है, सब लोग डरे और सहमे हुए है। नागरिकता संशोधन विधेयक में विपक्ष की बात नहीं सुनी जा रही है। धरने, प्रदर्शन हो रहे है। कश्मीर के हालात खराब है। भाजपा की पोल खुल रही हैं।