एबीएम कॉलेज में राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न

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जमशेदपुर। गोलमुरी स्थित एबीएम कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरविषयी राष्ट्रीय वेबीनार के दूसरे दिन वर्तमान परिदृश्य में लोक जनजातीय साहित्य एवं संस्कृति की प्रासंगिकता एवं महत्त्व विषय पर बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने आदिवासी जनजीवन पर केंद्रित अपने संबोधन में कहा कि आदिवासियों का जीवन जल जंगल और जमीन से जुड़ा है। इसके संरक्षण के लिए बड़े-बड़े कानून तो बन रहे हैं लेकिन जंगल में निवासित आदिवासियों के जीवन को बचाने की बड़ी चेष्टा नहीं की जा रही है। जबकि आदिवासी ही धरती के आदिमानव हैं। इनके तीर -धनुष को देख हम भ्रमपाले हैं लेकिन सतयुग, द्वापर, त्रेता युग के तीर धनुष को हम आज भी सम्मान देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जनजातीय मंत्रालय वैसे विश्वविद्यालय को चिन्हित कर रहा है जो आदिवासी संस्कृति के विकास में योगदान दे रहा है। इस दिशा में कोल्हान विश्वविद्यालय एवं एबीएम महाविद्यालय के कार्यों की उन्होंने मुक्त कंठ से सराहना किया। इस मौके पर उन्होंने महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित शोध सरिता का विमोचन किया तथा उत्कृष्ट शोध आलेख सम्मान एवं शोध आलेख के लेखक को प्रमाण पत्र देने की भी उद्घोषणा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के छात्रों द्वारा लोक गीत गायन के साथ हुआ। स्वागत वक्तव्य प्राचार्य सह आयोजन सचिव डॉक्टर मुदिता चंद्रा ने दिया। विषय प्रवेश सह आयोजन सचिव श्रीमती मीरा मुंडा ने करवाते हुए कहा कि लोक साहित्य से ही किसी देश और समाज की सभ्यता को समझा जा सकता है। बीज वक्तव्य देते हुए उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ कथाकार श्रीमती मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि साहित्य तो उस आदमी का होता है जो संघर्ष करता है। विशेषज्ञ वक्तव्य डॉक्टर जूही समर्पिता ने दिया। कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर डॉक्टर जयंत शेखर ने अपने वक्तव्य में जनजातीय लोक साहित्य पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन मैथिली विभाग के अध्यक्ष डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी ने किया तथा संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अवध बिहारी पुरान ने किया। दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार के आयोजन में कोल्हान विश्वविद्यालय के कन्हैया से सिंह, वेबीनार समन्वयक भवेश कुमार, नवनीत कुमार सिंह, डॉ उत्पल चक्रवर्ती, डॉ राजेंद्र भारती, डा बी बी भुइंया,प्रो बी पी महारथा, आरसी ठाकुर, ज्योति उपाध्याय, सुनीता पात्रो, राधेश्याम तिवारी आदि का सराहनीय योगदान रहा।