कांग्रेस में गए विधायक प्रदीप और बंधु पर दलबदल कानून के उल्लंघन का आरोप,सदस्यता रद्द करने की मांग

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रांची: प्रदेश की राजनीति में एक और नया मोड़ आ गया है। एक ओर दलबदल मामले में रांची उच्च न्यायालय में झारखंड विकास मोर्चा से भारतीय जनता पार्टी में गए बाबूलाल मरांडी के मुद्दे पर सुनवाई हो रही है। वहीं इस मामले को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में सियासत उफान पर है। खबर है कि विपक्ष ने भी सत्ता पक्ष पर वार करते हुए झारखंड विकास मोर्चा से विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के पर दलबदल कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

खबरों के अनुसार बीजेपी के विधायक समरी लाल ने भी कांग्रेस के दो विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है।बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष के ट्रिब्यूनल में दाखिल की गई याचिका में समरी लाल ने विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के पर दलबदल कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से इन दोनों विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अपील की है।

समरी लाल ने कहा है कि इन्होंने 10वीं अनुसूची का उल्लंघन किया है।यह दलबदल से संबंधित है। जिसके कारण इनकी सदस्यता तुरंत समाप्त की जानी चाहिए।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि 2019 के विधानसभा चुनाव में प्रदीप यादव पोरैयाहट विधानसभा और बंधु तिर्की मांडर विधानसभा से झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के टिकट पर निर्वाचित हुए थे.

समरी लाल ने कहा है कि विधायक निर्वाचित होने के बाद से ही दोनों पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे।इसको लेकर जेवीएम ने कारण बताओ नोटिस जारी किया।समय सीमा समाप्त होने के बाद जेवीएम ने केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया। दोनों की बर्खास्तगी की सूचना विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग को भी दी गई।

बीजेपी विधायक ने कहा है कि 11 फरवरी 2020 को जेवीएम की कार्यकारिणी की बैठक में दोनों विधायकों की पार्टी से बर्खास्तगी की पुष्टि की गई।जेवीएम का बीजेपी में विलय हुआ और इसकी सूचना भारत निर्वाचन आयोग को दी गई थी।निर्वाचन आयोग ने इस विलय को स्वीकार किया और इसके आधार पर जेवीएम अध्यक्ष रहे बाबूलाल मरांडी को बीजेपी, दोनों को निर्दलीय विधायक के रूप में मान्यता दी। बाद में दोनों ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, जो दलबदल कानून के नियमों का उल्लंघन है।

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