कारगिल में शहीद हुए जवान की बेटी बनी झारखंड में दरोगा

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हजारीबाग: 1999 के कारगिल युद्ध शहीद हुए गुमला के बिरसा उरांव के शहादत पर लोगों में गम के आंसू थे सलामी और तिरंगा भी शामिल थी लेकिन आज भी लोगों के आंखों में आंसू है सलामी और तिरंगे भी है लेकिन यह आंसू खुशी के हैं पूजा विभूति उरांव झारखंड पुलिस में दारोगा पद की शपथ ले रही थीं। पूजा गुमला के शहीद बिरसा उरांव की बेटी हैं। 1999 में कारगिल में देश की रक्षा करते हुए बिरसा ने अपनी जान देश पर कुर्बान की थी। शहीद पिता का तिरंगे में लिपटा शव देखकर आंखों में आंसू लिए पूजा ने संकल्प लिया था कि मैं भी देशसेवा करूंगी। दारोगा बन वह सपना साकार होता दिख रहा।पूजा के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्यों की भी आंख नम थीं। बेटी को वर्दी में देखकर गर्व की अनुभूति हो रही थी सीएम मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पासिंग परेड की सलामी ली। परेड के बाद प्रशिक्षु दारोगा और लोगों को संबोधित करते हुए सीएम ने उग्रवाद के खात्मे का संकल्प दोहराया कहा कि हमें विरासत में उग्रवाद मिला था, आज उग्रवादी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। हमारी सरकार ने ऐसी व्यवस्था दी है कि यहां गरीब, मजदूर और रिक्शा चालक के बेटा- बेटी भी दारोगा एवं अधिकारी बन रहे हैं। ये दारोगा जब थाने में जाएंगे तो युवा जोश और नेतृत्व के सहारे उग्रवादियों पर अंतिम प्रहार किया जाएगा।