गढ़वा वह जिला, जिसे सूखा के लिए अभिशप्त कहा जाता

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झारखंड- मझीआंव (गढवा) झारखंड का गढ़वा वह जिला है ।जिसे सूखा के लिए अभिशप्त कहा जाता है।सिचाई की कोई माकूल व्यवस्था नहीं होने के कारण आसमानी बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसानों के पाले में पैदावार नहीं बल्कि नुक़सान आता है।कभी किसी साल खेती हो भी जाये तो उसे ऊपरवाले का करम समझा जाता है।ऊपरवाले की वही इनायत इस वर्ष हुई थी ।जब ससमय हुई बारिश से जहां धान की अच्छी उपज हुई वहीं गेहूं का फ़सल भी बढ़िया हुआ।धान तो घर में सकुशल आया,पर गेहूं खेत में ही ख़ाक हो रहा है।क्योंकि जिले में लगातार अगलगी की घटनाएं हो रही हैं।हम बात अगर मझिआंव की करें तो यहां भी आग कहर बरपा रहा है।प्रखंड के दो गांव तलसबरिया और बिच्छी में आग ने इस कदर कहर बरपाया की जो किसान फ़सल की आस लगाए बैठे थे। उनके आंखों के सामने उनकी उपज जल कर राख हो गयी।

जहां एक तरफ़ तलसबरिया गांव में मंजूर खान,मारुद खान,विश्वनाथ यादव,गोपाल यादव,हरिहर यादव,सुरेश यादव एवं प्रह्लाद यादव के खेत में रखा गेहूं का सैकड़ा बोझा जल कर पूरी तरह राख हो गया,तो उधर बिच्छी गांव निवासी रामजीत रजवार के घर में आग लगी जिससे घर सहित सारा सामान पूरी तरह जल गया।उधर घटना के बाद तलसबरिया के किसान के साथ साथ बिच्छी के रामजीत रजवार द्वारा राहत की आस जोहा जा रहा था।लेकिन अब तलक प्रशासनीक स्तर पर उन्हें कोई राहत नहीं मिली,जब इस बावत सूचना जिला परिषद सदस्य कविता देवी को मिली तो वो सदस्य प्रतिनिधि सह समाजसेवी आशीष दुबे उर्फ चिंटू दुबे के साथ दोनो गांव में पहुंची जहां उनके द्वारा अगलगी का जायज़ा लिया गया ।

वहीं पीड़ित किसानों से मुलाक़ात कर उनकी व्यथा सुनी गयी।मौक़े पर सदस्य द्वारा तलसबरिया के सभी पीड़ित किसानों को 50-50 किलो गेहूं बतौर राहत प्रदान किया गया।वहीं घर जल जाने से बेआसरा हुए बिच्छी गांव के रामजीत रजवार को 50 किलो गेहूं के साथ राशन का सामान और पूरे परिवार को पहनने वास्ते कपड़ा दिया गया।जिला परिषद सदस्य कविता दुबे एवं समाजसेवी आशीष दुबे उर्फ चिंटू दुबे ने कहा कि यह राहत तो उनके तरफ़ से निजी तौर पर दिया गया है। जो इस आफ़त में नाकाफ़ी है,पीड़ित लोगों को पूरी तरह राहत मिले इस निमित उनके द्वारा प्रशासन के वरीय अधिकारियों से मिल कर जल्द सहायता दिलाया जाएगा।