चैत्र नवरात्र विशेष : अपने घरों में पूजा कैसे करें, नवरात्र पूजन की पूरी विधि

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धर्म कर्म : चैत्र मास के नवरात्र का आरंभ 25 मार्च,बुधवार से हो रहा है। नवरात्रि में रोज देवी को अलग-अलग भोग लगाने से तथा बाद में इन चीजों का दान करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है। जानिए नवरात्रि में किस तिथि को देवी को क्या भोग लगाएं-
प्रतिपदा तिथि (नवरात्र के पहले दिन) पर माता को घी का ।भोग लगाएं ।इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा शरीर निरोगी होता है ।
शेष कल……….. पंचाग के साथ

हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्ति मूलाधार में स्थित करते हैं व योग साधना करते हैं।
हमारे जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता व आधार का महत्व सर्वप्रथम है। इसलिए इस दिन हमें अपने स्थायित्व व शक्तिमान होने के लिए माता शैलपुत्री से प्रार्थना करनी चाहिए। शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा भी हैं । स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।
शेष कल……. पंचाग के साथ

भारतीय नववर्ष के प्रथम दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला वासंतिक नवरात्रि इस बार 25 मार्च को प्रारंभ हो रहा है जो दो अप्रैल रामनवमी तक चलेगा। नवरात्रि व्रत पारन तीन अप्रैल को किया जाएगा। नवरात्रि इस बार नौ दिनों का होगा। मां पराम्बा का आगमन इस बार नौका पर और गमन हाथी पर हो रहा है, दोनों का फल शुभ है।

कलश स्थापन

काशी के ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार घट स्थापन के लिए प्रात: काल का समय विशेष शुभ माना जाता है। प्रात: 5.58 से 09 बजे तक जो लोग कलश स्थापन न कर सकें, उनके लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.36 से 12.25 तक शुभ रहेगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 25 मार्च को दिन में 3.51 बजे तक रहेगी। इस समय तक कलश स्थापन अवश्य कर लेना चाहिए।

महानिशा पूजा

शास्त्र अनुसार महानिशा पूजा सप्तमी युक्त अष्टमी या मध्य रात्रि में निशीथ व्यापिनी अष्टमी में होनी चाहिए, जो 31 मार्च-1 अप्रैल की रात मिलेगी। महानिशा पूजन इसी दिन किया जाएगा। महाअष्टमी व्रत एक अप्रैल को किया जाएगा। चैत्र शुक्ल नवमी दो अप्रैल को मध्याह्न में व्याप्त होने से उसी तिथि को श्रीरामनवमी मनाई जाएगी।

पूजन विधान

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि में प्रात: नित्य कर्मादि-स्नादि कर संकल्पित हो ब्रह्मा जी का आह्वान करना चाहिए। आगमन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत-पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य-तांबूल, नमस्कार-पुष्पांजलि एवं प्रार्थना आदि उपचारों से पूजन करना चाहिए। नवीन पंचांग से नव वर्ष के राजा, मंत्री, सेनाध्यक्ष, धनाधीप, धान्याधीप, दुर्गाधीप, संवत्वर निवास और फलाधीप आदि का फल श्रवण करना चाहिए। निवास स्थान को ध्वजा-पताका, तोरण-बंदनवार आदि से सुशोभित करना चाहिए।

देवी पूजन के निमित्त तय स्थल को सुसज्जित कर गणपति व मातृका पूजन कर घट स्थापना करना चाहिए। इसके लिए लकड़ी के पटरे पर पानी में गेरू घोल कर नौ देवियों की आकृति बना कर नौ देवियों अथवा सिंह वाहिनी दुर्गा का चित्र या प्रतिमा पटरे पर या इसके पास रखनी चाहिए। पीली मिट्टी की एक डली व एक कलावा लपेट कर उसे गणेश स्वरूप में कलश पर विराजमान कराने के साथ ही घट के पास गेहूं या जौ का पात्र रखकर वरुण पूजन और भगवती का आह्वान करना चाहिए।

🌷 दुर्गा सप्तशती 🌷
🙏🏻 25 मार्च, बुधवार से चैत्र मास के नवरात्रि हैं जो कि 02 अप्रैल, गुरुवार तक चलेंगे। देवी मां प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। अगर आप पूरी दुर्गा सप्तसती का पाठ नहीं कर सकते हैं तो इसके कुछ मंत्रों का जप करने से भी शुभ फल मिल सकते हैं।
🙏🏻 दुर्गा सप्तसती के मंत्र बहुत ही चमत्कारी हैं, अगर विधि-विधान से इनका जप किया जाए तो भक्त को देवी की कृपा मिल सकती है। ये मंत्र और मंत्र जप की सामान्य विधि नीचे बताई गई है।
🙏🏻 मंत्र जप के लिए सावधानी
दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का सही उच्चारण के साथ जप करना चाहिए। यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जप करवाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। साथ ही मंत्र जप करने वाले व्यक्ति को पवित्रता और ब्रह्मचर्य का भी ध्यान रखना चाहिए।

👉🏻 ये जप की सामान्य विधि
➡ 1. नवरात्रि में रोज सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें।
➡ 2. इसके बाद घर के मंदिर में या किसी अन्य देवी मंदिर में आसन पर बैठकर मंत्रों का जप करें।
➡ 3. मंत्र जप के लिए लाल चंदन के मोतियों की माला का उपयोग करना चाहिए।
➡ 4. मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए।
🙏🏻 गरीबी से छुटकारा चाहते हैं तो नवरात्रि में रोज करें दुर्गा सप्तशती के इन मंत्रों का जप ।
👉🏻 ये हैं मंत्र
💷 1. गरीबी से मुक्ति पाने के लिए मंत्र
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता।।
😡 2. बुरी नजर से रक्षा के लिए मंत्र
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।
😴 3. परेशानियों को दूर करने के लिए मंत्र
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
💥 विशेष – इन 3 में से किसी एक मंत्र का जप कर सकते हैं या एक-एक करके तीनों मंत्रों का जप भी किया जा सकता है।