छह राज्यों को ऑक्सीजन देने वाला झारखंड ,आज उन्ही के मरीजों को ऑक्सीजन के अभाव

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झारखंड- मरीजों का दुर्भाग्य कहिए या प्रशासन तंत्र की शिथिलता। छह राज्यों को ऑक्सीजन देने वाले झारखंड के मरीजों की सांसें ऑक्सीजन के अभाव में थम रही हैं। यही नहीं, राज्य में जितनी खपत है, उससे लगभग सात गुना अधिक ऑक्सीजन का निर्माण हो रहा है। बावजूद इसके मरीजों में ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार है। घर से लेकर अस्पताल तक में ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों की मौत हो रही है। 

राज्य में पांच कंपनियां हैं, जो हवा से ऑक्सीजन का लिक्विड तैयार करती है। इसमें जमशेदपुर में तीन व बोकारो में दो कंपनियां हैं, जबकि राज्य में 20 कंपनियां इस लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में बदलकर सिलिंडरों में रिफिल करती हैं। ये कंपनियां जमशेदपुर, रांची, बोकारो, रामगढ़ व हजारीबाग में हैं। रिफिलिंग ईकाइयां लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में बदलकर उसे सिलिंडरों में भरकर मरीज या अस्पतालों तक पहुंचाती है। जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं, वहां लिक्विड ऑक्सीजन ही टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति की जाती है, जबकि कुछ अस्पतालों में जहां मैनीफोल्ड्स ऑक्सीजन सिस्टम है, वहां सिलिंडर के माध्यम से गैस ऑक्सीजन आपूर्ति की जाती है। 

आंकड़ों की बात करें तो झारखंड में औसतन प्रतिदिन 525 टन ऑक्सीजन का निर्माण हो रहा है, जबकि प्रतिदिन की खपत औसतन 62 से 70 टन ही है। अब सवाल है कि जब इतना ऑक्सीजन बन रहा है तो फिर दिक्क्त क्यों है। औषधि नियंत्रण विभाग के अनुसार निर्माण इकाई में ऑक्सीजन बनने के बाद वह रिफिलिंग यूनिट तक भी पहुंच रहा है, लेकिन वहां से मरीजों तक पहुंचने के लिए सिलिंडर की कमी बाधा बन रही है। ऑक्सीजन की उपलब्धता की स्थिति तो यह है कि झारखंड अपने लगभग सभी पड़ोसी राज्यों यथा-बिहार, बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है। साथ ही अब महाराष्ट्र को भी झारखंड से ही ऑक्सीजन देने का करार हुआ है। जल्द ही महाराष्ट्र को भी झारखंड से ही ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाएगी।