डोम जाती के परिवारों को अब भी नहीं है रहने का ठिकाना

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संवाददाता- विवेक चौबे

गढ़वा : पहले भी नहीं था ठिकाना, अभी भी नहीं है ठिकाना। बात की जा रही है मुसहर व डोम जाती के परिवार की। न ही इन्हें कहीं रहने का ठिकाना है, न पहले था। सरकार द्वारा भी इस जाति के प्रति कोई ध्यान नहीं है, जिससे इन्हें स्थायी रूप से रहने की व्यवस्था उपलब्ध हो जाए। इस जाति के प्रति शिक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था हो। यह मामला है जिले के कांडी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत हरिगावां मोड़ स्थित बस स्टैंड की, जहां पर रहने वाले डोम व मुसहर दो जाती समुदाय के लोग अब यहां नहीं रहेंगे। शुक्रवार की सुबह हरिगावां गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने दोनों जाती समुदाय के लोगों को जगह खाली कर देने की अल्टीमेटम दे डाला। प्राप्त जानकारी के अनुसार डोम जाती के लोग 15 वर्षों से वन विभाग की जमीन में रहा करते थे। वहीं तकरीबन 5 वर्षों से मुसहर जाती के लोग भी निवास करते थे। कुछ लोगों ने तो फुस की झुग्गी झोपड़ी के अलावे खपड़ैल मकान भी बना लिया था। वन विभाग की लापरवाही का आलम यह कि विभाग को जानकारी होने के बाद भी कोई कार्यवाई नहीं कि गयी थी। दोनों ही समुदाय के परिवारों पर गांव-देहात में चोरी करने का आरोप लगाते हुए वहां से हटने का अल्टीमेटम दे दिया गया। ज्ञात हो कि फरवरी महीने में 10 तारीख को एक ही रात तीन घरों में चोरी हुई थी। कांडी पुलिस द्वारा कार्यवाई करते हुए मोबाइल भी जब्त किया गया था। इसी चोरी कांड को लेकर उक्त गांव के आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीण जगह खाली करने की सूचना देने पहुंचे। सूचना के अनुसार उक्त दोनों जाती के समुदायों द्वारा शाम 4 बजे तक जगह खाली करने की बात कही गयी। चार घर मुसहर जाती का व तीन घर डोम जाती का है। राजेन्द्र मुसहर, शिवनाथ मुसहर, सुरेंद्र डोम, सीताराम डोम, सकेन्द्र डोम सहित सभी दो जाती के रहने वाले लोग जगह खाली कर देंगे। अल्टीमेटम मिलने के बाद सुरेंद्र राम डोम ने कहा कि गांव में चोरी मुसहर किए थे। लेकिन एक जगह रहने के कारण मेरा भतीजा को पुलिस पकड़ कर जेल भेज दी है। हम सभी कई पुसूत से यहां रहते आ रहे हैं। अब गांव वाले जगह खाली करने को बोल रहे हैं। यह जगह खाली कर हम सभी लमारी चले जाएंगे। वहीं चौकीदार- महेंद्र पासवान भी उपस्थित थे। बता दें कि दोनों जाती के समुदायों को जगह खाली करने की सूचना देने पहुंचने वालों में उक्त गांव के पंचायत स्वयं सेवक- सुनन्द कुमार, शिवशंकर चंद्रवंशी, प्रमोद पासवान, उपेंद्र पासवान, सूरज कुमार, मुनेश्वर तातो, मनोज चंद्रवंशी, अनुज सिंह, शिवप्रसाद तातो, अमरेश कुमार, राजा सिंह, प्रेमशंकर प्रजापति, जगरनाथ प्रजापति सहित सैकड़ों लोगों का नाम शामिल है। उक्त गांव के कुछ लोगों द्वारा झोपड़ी गिराने का भी प्रयत्न किया गया।