नहीं रहे प्रसिद्ध कथाकार विनोद पाठक, चहेते जगह-जगह कर रहे शोक सभा का आयोजन

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संवाददाता- विवेक चौबे

गढ़वा :- इस दुनिया में मरने के बाद केवल नाम ही यादगार बन कर रह जाता है। ऐसे ही एक शख्स की टिप्पणी हम आज करते हैं। भगवान के तो प्यारे हो ही गए वे, किन्तु आज भी लोग उन्हें याद कर रहे हैं, कल भी याद करेंगे। उनकी गायकी के दीवाने लोग इस कदर थे कि हजारों की संख्या में बहुत दूर-दूर से लोग पहुंचकर उनके द्वारा प्रस्तुत प्रवचन का श्रवण कर लाभान्वित हो रहे थे। साथ ही उनकी गायकी का भी लोग खूब आनन्द ले रहे थे।

संस्कृत की ओ श्लोक, मंगलाचरण व स्तुति आज भी लोगों के दिल में है। ऐसा प्रतीत भी होता है कि वे मर कर भी जिंदा हैं, क्योंकि वास्तव में वे जिंदा दिल ही थे। वे अत्यंत मधुरभाषी थे। वे अब हमारे बीच नहीं रहे। यह खबर जानकर उनके लाखों चहेते हतप्रभ हो गए। उभरते हुए लोक शैली के शसक्त हस्ताक्षर महान मानस वक्ता थे वे, जिन्होंने अल्प समय में पूरे भारत वर्ष के कई विशिष्ट ज्ञान मंचों को गौरान्वित किया था। रामकथा को तो बड़े ही सहज व सरल भाषा में प्रस्तुत करते थे। विरासत में मिली धरोहर को बढ़ाते हुए हर जगह कामयाबी का परचम लहराया था। स्वर्गीय ललिता पाठक के संगीतमय कथावाचन का सम्पूर्ण डीएनए उतर आया था उनमें। सभी लोग भावुक व स्तब्ध तो तब हुए जब उनके निधन की खबर मिली। वे रामकथा व भागवत कथा के वाचक, स्वर संगीत भोजपुरी संकीर्तन सम्राट व साहित्य के धनी पंडित विनोद पाठक अब नहीं रहे।

उनके अकस्मात निधन की खबर से उनके प्रवचन के लाखों दीवाने अब मायूस हैं, क्योंकि मानस जगत में अपूरणीय क्षति हुई है। पंडित विनोद पाठक सुप्रसिद्ध कथावाचक व गढ़वा पलामू से अटूट लगाव रखने वाले थे। कीर्तन सम्राट व बिहार के सुप्रसिद्ध रामकथा के सरस प्रवक्ता थे। बता दें कि कथावाचक पंडित विनोद पाठक बिहार के रोहतास जिला अंतर्गत मोथा नामक गाँव के निवासी थे। वाराणसी काशी उनका कार्य क्षेत्र था। उनके दो पुत्र हैं। सभी नाबालिक हैं। वे पत्नी, पुत्र सहित भरा पूरा परिवार छोड़ चले। उनके पिता- स्व ललिता पाठक भी प्रवचण के निपुण कथावाचक थे। विनोद पाठक सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल में 2003 ई. से आते थे।

जमुहार हॉस्पिटल सासाराम रोहतास में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार वे कुछ दिन पहले कोरोना से संक्रमित थे। उसके बाद हृदय में असहनीय पीड़ा के साथ घातक बीमारी हुई, जिससे उनकी मौत हो गयी। सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल का प्रांगण तब गूँजमान होता था, जब वे प्रवचन मंच पर मंचासीन होकर संस्कृत के शुद्ध श्लोक के साथ प्रवचन किया करते थे। बीच-बीच में हास्यपद बातें कहकर प्रवचन मंडप में बैठे सभी श्रोताओं के दिल पर राज करते थे। तालियों की गड़गड़ाहट से उनके प्रवचन ही नहीं पूरे मेला क्षेत्र में चार चांद लग जाता था।

कथाकार- विनोद पाठक की अकस्मात निधन पर उनके चहेते जगह-जगह शोक सभा का आयोजन कर रहे हैं। इसी क्रम में हरिहरपुर ओपी क्षेत्र अंतर्गत मेरौनी गांव में भी कामेश्वर तिवारी की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया, जहां अशर्फी तिवारी, वशिष्ट तिवारी, अमरनाथ तिवारी सहित अन्य लोग भी शोक सभा में शामिल होकर 2 मिनट का मौन धारण किए। जबकि कांडी प्रखण्ड में भी भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष- रामलला दुबे की अध्यक्षता में भी शोक सभा का आयोजन किया गया। कथाकार- विनोद पाठक की प्रतिमा पर पुष्प व पुष्पमाला अर्पित कर दो मिनट का मौन धारण किया गया, जिससे मृतात्मा को शांति प्रदान हो।

उक्त शोक सभा में राजेंद्र पांडेय, शशिरंजन दुबे, अरुण पांडेय, जित्येन्द्र सिंह,विनोद प्रसाद, प्रदीप दुबे सहित अन्य लोग शामिल थे। वहीं पतीला गांव में यज्ञ समिति के तत्वधान में शोक सभा का आयोजन किया गया। आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण किया गया। अध्यक्ष वैधनाथ पांडेय, सचिव नागेश्वर साह, उपाध्यक्ष सूर्यदेव राम, कोषाध्यक्ष राजू कुमार व सदस्य अनुज पांडेय, जित्येन्द्र सिंह, अखिलेश पांडेय सहित अन्य लोग भी उक्त शोक सभा में शामिल थे।