पाकिस्तानी हिंदू, बोले- हम भारत माता की……….

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वार्ता स्पेशल: (रिपोर्ट सतीश सिन्हा की) एक ओर देश में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हो रहा है वहीं दूसरी ओर नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में भी अब प्रदर्शन होने लगे हैं इसका ताजातरीन उदाहरण दिल्ली के राजघाट पर देखने को आया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शरणार्थियों ने गुरुवार को राजघाट पर नागरिकता कानून के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान कई लोग मौजूद रहें। उनके हाथों में भारत का झंडा और उसके साथ होर्डिंग्स, बैनर तख्तियां वगैरह भी मौजूद थी।

हम भारत माता के बच्चे हैं

उनमें से एक होर्डिंग्स पर लिखा हुआ था। ‘हम भारत को मां कहते हैं हम भारत के बच्चे हैं’। इसके अलावा होर्डिंग्स पर यह भी लिखा था, ‘पीएम मोदी का सम्मान लाखों विस्थापितों को जीवन दान’।

गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र बुधवार को सड़क पर उतरकर नागरिकता कानून के समर्थन में नारे लगाए। छात्रों ने पुलिस जिंदाबाद के नारे भी लगाए थे।

वहीं एक अन्य खबर के मुताबिक गुरुवार को महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। पांच सौ से अधिक की संख्या में एकत्रित होकर इन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पास करने के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया।इन लोगों ने पूछा कि नागरिकता कानून से किसी वर्ग के हितों को नुकसान नहीं पहुंचता है। ऐसे में किसी को इस कानून से परेशानी क्यों होनी चाहिए? भीड़ ने बार-बार ‘भारत माता की जय’ और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए।

वही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज से लगभग 30 साल पहले अफगानिस्तान से भागकर दिल्ली आए दर्शन सिंह तिलकनगर की गुरुअमरदास कॉलोनी में रहते हैं। उनके साथ लगभग तीस हजार सिख लोग ऐसे हैं, जो अफगानिस्तान से जान बचाकर भागकर हिंदुस्तान पहुंचे हैं। इनका कहना है कि वे भी पूर्व में अखंड भारत का हिस्सा थे। पूर्व में किन्हीं कारणों से उनका देश अलग कर दिया गया था, तो क्या उन्हें भारत में रहने का विकल्प नहीं मिलना चाहिए?अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था आज बदहाल है। उसकी पूरी अर्थव्यवस्था भारत और अमेरिका जैसे देशों से मिल रहे सहयोग पर निर्भर करती है। दर्शन सिंह ने बताया कि उनकी कौम बिजनेस करने वाली है। कभी अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था का लगभग एक चौथाई केवल सिखों और हिंदुओं के बिजनेस से आता था लेकिन इस्लामी कानूनों की आड़ में उनसे हमेशा लूटपाट की जाती थी।उनके सामने केवल दो विकल्प रह गए थे- या तो इस्लाम कबूल कर लें या मौत को गले लगा लें। इन्हीं परिस्थितियों में उनके जैसे हजारों सिख परिवारों ने भारत का रुख कर लिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें भी इस कानून से अधिकार मिल जाएंगे, तो वे सच्चे भारतवासी बन सकेंगे और भारत के विकास में अपना पूर्ण योगदान दे सकेंगे। वहीं बीस साल पहले भारत आए किरपाल सिंह सचदेवा का कहना है कि अफगानिस्तान में उन लोगों का जीना मुहाल हो गया था। इस्लामिक कानूनों के चलते अपने ही देश में उनकी स्थिति भिखारियों जैसी हो गई थी। आर्थिक दमन तो किसी प्रकार से सहन कर लिया जाता है, लेकिन महिलाओं के साथ किसी भी वक्त कुछ भी हो जाने की आशंका से उन लोगों ने परिवार के साथ घर-बार छोड़ दिया। वह कहते हैं कि अगर हिंदुस्तान उन्हें शरण नहीं देगा तो वे कहां जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर खबरों के मुताबिक शरणार्थी हिंदुओं के इस प्रदर्शन के दौरान पूरे राजघाट और आसपास के इलाकों में पुलिस चौकस थी। पुलिस ने दिल्ली गेट, दरिया गंज, आइटीओ और बाहरी मुद्रिका मार्ग पर पूरी निगरानी रखी थी। इस दौरान किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस ने आसपास के इलाकों में बैरीकेडिंग कर दी थी। सुरक्षा संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष और विपक्ष में आज प्रदर्शन

वहीं अन्य खबरों के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली में दो बड़े विरोध-प्रदर्शन आयोजित होने की संभावना है। दोपहर भीम आर्मी की ओर से जामा मस्जिद गेट नंबर-1 से जंतर-मंतर तक मार्च का आह्वान किया गया है। दूसरी ओर कुछ संगठनों की ओर से शुक्रवार को शाम राजीव चौक मेट्रो स्टेशन गेट-7 पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया है। हालांकि पुलिस ने दोनों प्रदर्शनों को अनुमति नहीं दी है साथ ही इसको लेकर पुलिस चौकस है। गुरुवार की तरह शुक्रवार को भी मोबाइल व इंटरनेट पर पाबंदी के अलावा धारा-144 लगाया जा सकता है।