पेपरलेस बनाने की तैयारी में नए हाईकोर्ट

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झारखंड- झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन में सब कुछ पेपरलेस करने की तैयारी की जा रही है। याचिका से लेकर सुनवाई तक में कागज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सभी मामलों की डिजिटल सुनवाई की जाएगी। प्रार्थी की ओर से दायर याचिका, प्रतिवादी का जवाब और सभी दस्तावेज डिजिटल मोड में फाइल होंगे। सभी की स्कैन कॉपी जजों के लैपटॉप में रहेगी और लैपटॉप से ही सभी दस्तावेजों को जज देखेंगे। मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश भी डिजिटल ही लिखाया जाएगा। हाईकोर्ट ने सरकार से नए कोर्ट भवन में इसकी व्यवस्था करने को सुझाव दिया है और इसके लिए अभी से ही कदम उठाने को कहा है। झारखंड हाईकोर्ट के सभी पुराने केसों से संबंधित दस्तावेजों को डिजिटल करने का काम अंतिम दौर में है। इसके लिए 32 आधार बनाए गए हैं। इसमें बेंच कोड, केस टाइप, केस नंबर, प्रार्थी, प्रतिवादी का नाम, दोनों पक्षों के वकील के नाम, जिला, जज का नाम, मामले के निष्पादन की तिथि समेत अन्य बिंदु शामिल हैं। इसके आधार पर रिकॉर्ड देखा जा सकेगा। दस्तावेजों के डिजिटल होने से केस का रेफरेंस आसानी से मिलेगा। रिकॉर्ड निकालने में विलंब नहीं होगा और सभी रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेंगे।

पेपरलेस सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही ट्रायल किया था और ट्रायल सफल रहा था। 20 मई को चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने पेपरलेस सुनवाई की थी। इस दिन दस मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे। इसमें दो मामलों का निष्पादन भी किया गया। दोनों मामले के आदेश लिखा कर ऑनलाइन जारी कर दिया था। इसके बाद से ही हाईकोर्ट को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की तैयारी शुरु हो गयी है। वर्तमान में याचिका ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से फाइल हो रही हैं। ई मेल से फाइल होने वाली याचिकाओं का प्रिंट निकाल कर फाइल में रखा जा रहा है। पेपरलेस कोर्ट होने के बाद एक भी कागज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उच्च न्यायालय के सभी अदालतों में यही व्यवस्था धीरे- धीरे लागू की जाएगी।