प्रदेश की इस महिला को मिला था पद्मभूषण,पीएमओ से फोन आया, कहा अभी टाइम नहीं है….

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जमशेदपुर: सरायकेला-खरसावां जिला के गम्हरिया प्रखंड के बीरबांसपुर स्थित भोलाडीह गांव की रहने वाली छुटनी महतो जो डायन बिसाही के नाम से पीड़ित हो चुकी है और पीड़ितों की मददगार बनकर उनका हौसला बढ़ा रही है और मदद कर रही है। उसे केंद्र सरकार के द्वारा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या डायन-बिसाही के खिलाफ संघर्ष के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। इधर छुटने को पदम श्री मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के द्वारा अपने फेसबुक पर उनके संघर्ष को सलाम करते हुए बधाई दी गई है।

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छुटनी के मुताबिक पद्मश्री क्या चीज है, मुझे नहीं पता परंतु जरूर कोई बड़ी चीज होगी इसलिए उन्हें लगातार फोन आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री कार्यालय से किसी के द्वारा फोन किया गया और कहा गया कि आपको पद्मश्री मिलेगा। छुटनी ने कहा कि अभी टाइम नहीं है, एक घंटे बाद फोन करना।छुटनी ने बताया कि दोबारा दोपहर 12.15 बजे फोन पर कहा गया कि उनका नाम और फोटो सभी अखबार और टीवी चैनलों पर आएंगे। इस बात से गांव वाले खुश है बाहर से भी लगातार फोन आ रहे हैं। जिससे पता चलता है कि पदम श्री कोई बड़ी चीज है।

बता दें कि गम्हरिया स्थित मतलाडीह गांव में छुटनी को डायन पुकारा जाने लगा। साथ ही गांव में घटने वाली घटनाओं का जिम्मेदार माना जाने लगा।डायन बिसाही के नाम से अत्याचार पर पेड़ से बांधकर पीटा गया अर्धनग्न कर घुमाया गया और मल मूत्र पिलाया गया था।

बताया जाता है कि छुटनी की शादी नाबालिग अवस्था में ही धनंजय महतो से हुआ था। जबकि धनंजय महतो के बड़े भाई भजोहरि उसे पसंद नहीं करता था। जिसका कारण या बताया जाता है कि भजोहरी अपने भाई की शादी अपनी साली से कराना चाहता था। छुटनु के साथ शादी होते ही भजोहरि गाली गलौज मारपीट करना भी शुरू कर दिया। और तो और उसके घर में चोरी भी करवा दी। उसके बाद छुटनी अपने परिवार के साथ गांव से बाहर चली आई और झोपड़ी बनाकर रहने लगी। इसी दौरान भजोहरी की बेटी बीमार रहने लगी। उसकी बेटी ने चाची पर ही डायन बिसाही का आरोप लगा दिया। भजोहरि ओझा गुनी करने लगे और ओझा ने भी छुटनी को ही डायन करार दे दिया। गांव में सभा के दौरान भी भजोहरि की बेटी ने कहा कि वह सपने में भी उसे तंग करती रहती है। उसके बाद से गांव वालों ने छुटनी पर हमला कर दिया। वह किसी तरह जान बचाकर अपने मायके गम्हरिया प्रखंड के बीरबांस के भोलाडीह गांव भाग कर आ गई।

उसके बाद इस बात की जानकारी जमशेदपुर के एक लीगल एड फ्री कमेटी को मिली और कमेटी ने भोलाडीह से जमशेदपुर लाज और आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कराया। वहीं भोलाडीह में छुटनी के भाइयों ने अपने गांव से बाहर घर बना दिया, जहां वह अपने दो बेटों, एक बहू के साथ रह रही है। वहां फ्री-लीगल एड कमेटी की एक्जीक्यूटिव मेंबर और सेंटर की इंचार्ज है।

उसके बाद उसने अपनी आपबीती के खिलाफ संघर्ष करने का ठान लिया और डायन बिसाही के नाम से प्रताड़ित हो रहे हैं महिलाओं के मदद के लिए अक्सर खड़ी हो जाती है। गांव वालों को समझाने की कोशिश करती है ना मानने पर कानून का सहारा लेती है।

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