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“फांसी” देने की “लोग” मांग कर रहे ‘चहुं” ओर,देखें पूरी रिपोर्ट

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विवेक चौबे

गढ़वा : बेटी बहना, घर की गहना। वहीं सरकार का भी है कहना कि बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ। इस प्रकार की बातें केवल बातें बन कर रह गयी हैं। बेटी,महिला कितना सुरक्षित हैं,यह पता चलता है, इस खबर से ही।

“बेटी” को आखिर, कोई “बचाए” तो कैसे ?

कोई भी बाप बेटी को तो इस डर से पैदा भी नहीं करता कि आए दिन बाप का पगड़ी,सिर से नीचे गिर न जाए। समाज की चिंता उन्हें तब सताने लगती है,जब रोज कहीं न कहीं बेटियों के साथ अत्याचार व दुष्कर्म हो रहा है। यदि किसी ने भूल वश बेटी को जन्म दे भी दिया तो बेटी का जीवन खतरे में कब पड़ जाए,क्या पता।

दिल दहलाने वाली, घट रही घटना

आपने तो अखबार में पढ़ा या TV के माध्यम से तो देखा व जाना ही होगा कि हैदराबाद में एक डॉक्टर के साथ जो घटना घटी वास्तव में दिल दहला देने वाली थी। वह भी कोई साधारण लड़की,महिला नहीं बल्कि एक डॉक्टर के साथ घटी घटना है। डॉक्टर प्रियंका रेड्डी के साथ हुए अत्याचार,दुराचार जैसे घटिया हरकत, व्यवहार व दुष्कर्म किया गया जो किसी भी दृष्टि कोण से अपराध ही नहीं बल्कि महा अपराध है।

“अपराधियों” ने “दुष्कर्म” कर, “जला” भी दिया

दुष्कर्म के बाद प्रियंका रेडी को मौत के घाट उतार कर बेजान शरीर को भी आग के हवाले कर दिया गया। सायद,इस डर से की कोई साक्ष्य न रह जाए। उन अपराधियों को क्या पता कि कानून का हाथ इतना लंबा होता है कि बचना मुश्किल है। सरकार या कानून उन अपराधियों को क्या सजा क्या देगी,विचाराधीन है। देश मे जगह-जगह आवाज उठ रही है। लोग कैंडल मार्च निकालकर आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।

“दोषियों” के लिए, मांग रहे “फांसी”

बता दें कि हैदराबाद में डॉ प्रियंका रेडी के साथ हुए सामुहिक दुष्कर्म के घटना के विरुद्ध में कांडी प्रखण्ड में सोमवार को देर शाम एक शोक सभा का आयोजन किया गया। दृष्टि यूथ ऑर्गनाइजेशन के सचिव- साजिद शैम के नेतृत्व में आयोजित शोक सभा में शामिल सैकड़ों युवाओं ने कैंडल जलाकर कांडी स्थित उच्च विद्यालय से बाजार स्थित कर्पूरी चौक तक कैंडल मार्च करते हुए उक्त घटी घटना पर आक्रोश व्यक्त किया व सामुहिक दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।

“दुष्कर्म” को बताया “जघन्य” अपराध

युवाओं ने कहा कि एक डाक्टर के साथ सामुहिक दुष्कर्म कर जिंदा जला देना जघन्य अपराध है,इसलिए दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा हो।

जताया “आक्रोश”

दृष्टि यूथ ऑर्गनाइजेशन के प्रधान सचिव- शशांक शेखर , जयप्रकाश विश्वकर्मा , सूर्य प्रकाश , गौरव कुमार , मणिकांत कुमार, बबन , राहुल, सुजीत, मोहन सहित सैकड़ों युवाओं व बच्चों ने भी आक्रोश जताया।

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