फिर हुई मानवता शर्मसार…. चार कंधे नहीं मिले तो ऐसे गई लाश!

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(एजेंसी:) कभी ठेले पर तो कभी साइकिल तो कभी ठेले पर पार्थिव शरीर ले जाने की बात उड़ीसा में तो आपने सुन लिया लेकिन इस बार उड़ीसा में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित हो गया जिसमें बामड़ा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 4 किमी दूरी पर मिथूपड़ा गांव में दिगंबर नामक गरीब को अपनी अंतिम यात्रा में चार कंधे तक नहीं मिलने की खबर है और खबर यह है कि उन्हें बिना अंतिम क्रिया कर्म के ही जमीन में दफना दिया गया। यह बात हैरान कर देने वाली है कि दिंगबर पंडा ने अपने जीवन के कई वर्ष गुजारे जिस मिथूपाड़ा गांव में वहां मात्र एक इंसान ने उन्हें इंसान समझा और अपने सामर्थ्य के मुताबिक अनुसार अंतिम संस्कार किया।

खबरों के अनुसार खुर्दा जिला के बाघमाली गांव के निवासी दिगंबर पंडा काफी दिनों से मिथूपड़ा गांव में कविराज कपिल रक्सा के घर के समीप एक पेड़ के नीचे कबाड़ बेचकर अपना भरण-पोषण करते थे।

बताया जाता है कि पिछले कुछ दिनों से वे बीमार थे लेकिन तबीयत ठीक होने की आस लिए दिगंबर रोजी-रोटी में लगे रहते थे। अचानक शुक्रवार को उनकी मौत हो गई।

पिछले दिनों उनकी तबीयत बिगड़ गयी। दो-एक दिन में हालत में सुधार होने की उम्मीद लिए दिगंबर अपनी रोजी-रोटी के जुगाड़ में लगे रहते। उनकी हालत देख कपिल रक्सा ने उन्हें बामड़ा अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन शुक्रवार की शाम उसकी मौत हो गई।कपिल रक्षा ने इस बात की खबर उनके परिजनों को भी दे दी। लेकिन किसी ने उनकी लाश की सुध नहीं ली। जिसके बाद अस्पताल से शव परिवार तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी और निजी वाहन वाले ज्यादा भाड़ा मांग रहे थे।ऐसे में कपिल रक्सा को एक तरकीब सूझी उसने बाइक पर पार्थिव शरीर ले जाने की सोची लेकिन यह अकेले संभव नहीं था इसलिए उसने अपने दोस्त शंकर देहूरी को बड़डूमर गांव से बुला लिया और दोनों दोस्त बाइक पर उस इंसान के पार्थिव शरीर को ले जाकर अपना इंसानियत का फर्ज ऐसे अदा किया देखें

दोनों दोस्त बाइक से दिगंबर का पार्थिव शरीर लेकर मिथूपड़ा पहुंचे और गांव के श्मशान में दफनाकर अंतिम संस्कार किया।लेकिन यह सब देखते हुए भी गांव के किसी व्यक्ति के इसमें शामिल नहीं होने के कारण यह चर्चा का विषय बनी हुई है।