दो बैलों को घायल कर क्षेत्र में घूम रही है बाघिन… खौंफ में टुसू मनाएंगे घाटशिला के लोग

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जमशेदपुर:पश्चिम बंगाल के जंगलों से निकलकर एक बाघिन और उसके शावक के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला वन क्षेत्र में घुस जाने के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल कायम है। इसका मुख्य वजह बताया जा रहा है कि एक ओर पिछले दिनों जंगल की ओर घास चरने गये दो बैलों पर बाघिन ने हमला कर दिया। जिससे उनके शरीर पर खरोंच के निशान दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सुखदेव मुंडा का बैल शुक्रवार से लापता है। इसके अलावा बाघिन के हमले में जख्मी दोनों बैल के इलाज में वन विभाग के द्वारा किसी तरह की मदद नहीं पहुंचाने की खबर है। बैल के मालिक दास मुंडा की पत्नी सुमित्रा मुंडा ने बताया कि सरकारी इलाज नहीं मिलने के बाद शनिवार को बंगाल के मिर्गीचांम गांव से पशु चिकित्सक को बुलाकर दो पीतल की हंड्डिया बेचकर उससे घायल बैलों का इलाज करवाया। वहीं बैल का ठीक ढंग से इलाज नहीं होने के कारण बैल की स्थिति खराब है।

खबरों के अनुसार बाघिन के खौफ से ग्रामीण रात में जागकर पहरा करने के लिए मजबूर हैं। इधर घाटशिला के रेंजर दिनेश कुमार ने वन विभाग टीम के साथ घाटशिला वन क्षेत्र के फुलझोर, कायराडीह, डायनमारी के गांवों में जाकर के लोगों से वस्तुस्थिति की जानकारी ली है। साथ ही वन विभाग ने कुछ पंजों के निशान लेकर जांच के लिए डिवीजन भेज दिया है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट इसकी जांच करेंगे।खबरों के मुताबिक वन विभाग अलर्ट मोड पर है झारखंड बंगाल के सीमावर्ती व जंगल से सटे गांवों में फॉरेस्ट गार्डो ने ग्रामीणों को लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट करके सतर्क रहने को कहा और किसी आपात परिस्थिति में वन विभाग को सूचित करने को कहा है।

रविवार वन विभाग के गार्ड संजय दास व विभाग के अन्य कर्मचारी फुलझोर, भुमरू, सैमनेगी, बालीडीह, काशीडांगा, डायनमारी व वासाडेरा में लाउड स्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को सावधान व जागरूक किया।

अनाउंसमेंट करके ग्राम वासियों से कहा गया है कि वे मवेशी जंगल में न भेजें साथ ही लकड़ी चुनने, बबई घास, पत्ता तोड़ने आदि के कार्यों के लिए जंगल ना जाएं। इस घोषणा के बाद ग्रामीण घरों में रहने को मजबूर है। लोग जंगल के रास्ते का इस्तेमाल ना के बराबर कर रहे हैं इसका प्रभाव यह पड़ा कि साप्ताहिक हॉट में लोग नहीं पहुंच रहे हैं। जबकि वन विभाग संभावित क्षेत्रों में चुस्त-दुरुस्त और अलर्ट पर है।

बहरहाल ग्रामीण खौफ के साए में बाजार हाट और इधर उधर भी नहीं जा पा रहे हैं ऐसे में वे कैसे मकर पर्व मनाएंगे यह समझा जा सकता है।