बाबूलाल के सहारे सीएम हेमंत से दुमका सीट छीनने के फिराक में लगी भाजपा

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[वार्ता स्पेशल: रिपोर्ट सतीश सिन्हा की] झारखंड विकास मोर्चा के भाजपा में विलय होने और भारतीय जनता पार्टी को जिस आदिवासी चेहरे की तलाश थी वह बाबूलाल मरांडी के रूप में मिल जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारे में जोर शोर से चर्चा होने लगी है कि अब सत्ता पक्ष और विपक्ष एक बार अपना दमखम फिर से दुमका में विधानसभा उपचुनाव में दिखाएंगे। खास बात यह है कि यह सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास थी लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दो जगह से विधानसभा चुनाव बरहेट और दुमका से लड़े थे और दोनों जगह से चुनाव जीत गए थे। उसके बाद उन्होंने दुमका से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में दुमका विधानसभा उपचुनाव 6 महीने के अंदर होने को है और भारतीय जनता पार्टी अब बाबूलाल मरांडी को सामने रखकर हेमंत सोरेन से यह सीट छीनने की जुगत में लग चुकी है।

वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा अब फिर से यह सीट अपने कब्जे में ही रखना चाहती है वैसे में दुमका के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष में जोरदार मुकाबला होने की संभावना है। और तो और राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गृहक्षेत्र दुमका क्षेत्र जो आदिवासी बेल्ट है बाबूलाल मरांडी की अच्छी पकड़ है।

सूत्रों का कहना है कि झारखंड विधानसभा चुनाव में रघुवर दास के नेतृत्व में खाए मात का बदला बीजेपी दुमका का उपचुनाव बीजेपी बाबूलाल मरांडी के सहारे जीतना चाहती है और बाबूलाल मरांडी निर्देशन में चुनाव लड़ने की तैयारी में लग गई है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि इस उपचुनाव की कमान बीजेपी बाबूलाल मरांडी को इसलिए देना चाहती है कि वही पार्टी में फिलहाल सबसे बड़े आदिवासी चेहरे हैं और सोरेन परिवार के गृहक्षेत्र यानी दुमका के सियासी समीकरणों से वाकिफ हैं। बाबूलाल मरांडी ही वह नेता हैं जो हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन को 1998 के लोकसभा चुनाव में दुमका से मात दे चुके हैं। बाद में 1999 के चुनाव में शिबू सोरेन की पत्नी को भी बाबूलाल मरांडी ने दुमका से हराया था।

बीजेपी से 1991 और 1996 का चुनाव भी उन्होंने शिबू सोरेन के खिलाफ दुमका से लड़ा था मगर हार गए थे।दुमका से शिबू सोरेन को हराने के कारण बाबूलाल मरांडी को सबसे ज्यादा शोहरत मिली थी क्योंकि शिबू सोरेन झारखंड के अब तक के सबसे बड़े आदिवासी चेहरे माने जाते हैं।

वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि दुमका विधानसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा से कौन प्रत्याशी होगा। गलियारों में संभावना व्यक्त की जा रही है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से इस सीट से अपने छोटे भाई वसंत सोरेन या फिर पत्नी कल्पना को उतार सकते हैं। इसके अलावा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि 2019 का लोकसभा चुनाव हार जाने वाले पिता शिबू सोरेन को भी दुमका से चुनाव मैदान में फिर से हेमंत सोरेन लड़ा सकते हैं।

बता दें 2015 के विधानसभा चुनाव तक दुमका विधानसभा सीट बीजेपी के कब्जे में थी। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी से डॉ. लुइस मरांडी जीतीं थीं जो रघुवर सरकार में मंत्री भी बनी थी लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन से वह तेरह हजार से ज्यादा वोटों से हार गईं थीं।

बहरहाल दुमका का उपचुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष की भविष्य की राजनीति कि एक बार फिर नए सिरे से दिशा तय करेगा और इसी आधार पर अगला विधानसभा चुनाव दोनों पक्ष लड़ेगा नफा नुकसान देख कर।