बॉर्डर पर घेराबंदी, विपक्ष में खलबली, राकेश टिकैत बोले किसान या पाकिस्तान!

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एजेंसी: दिल्ली बॉर्डर पर बैरीकेड लगाए जा रहे हैं। सडक़ों पर लोहे के कीले गाड़ दिए गए हैं। सीमेंट की दीवाल बनाए जाने के बाद किसान नेताओं समेत विपक्षी खेमे में खलबली मच गई है। साथ ही देश में किसानों की हमदर्दी लूटने के लिए विपक्ष के क्या ‘आप’ , कांग्रेस ,समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल समेत अकाली दल सभी किसानों के साथ दिखाई दे रहे हैं।जितनी तरह के मुंह उतने बोल शुरू हो गए हैं।भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि गाजीपुर बार्डर पर जिस तरह किसानों को घेरा जा रहा है ऐसे में वह कृषि मंत्री से बातचीत करने के लिए कैसे पहुंचेंगे। उन्होंने सरकार से कहा है कि हम लोग किसान हैं, पाकिस्तान नहीं जो हमारे साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा ने बकायदा बॉर्डर पर घेराबंदी का वीडियो ट्विटर पर जारी करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री जी, अपने किसानों से ही युद्ध।

इधर कांग्रेसी राहुल गांधी अभी कहां पीछे हटने वाले थे।उन्होंने सवाल भी पूछा है कि सरकार बताए कि इस तरह की घेरेबंदी से निकलकर किसान आखिर किस तरह वार्ता के लिए सरकार के पास पहुंच पाएंगे। क्या सरकार किसानों से वार्ता करना नहीं चाहती है। उन्होंने कहा कि यह कीलें गाड़ कर सरकार कौन सा किला बना रही है। गाजीपुर बार्डर के चारों तरफ ये क्यों कर रही है पुलिस? इन कीलों से गुजर कर बातचीत करने के लिए आना पड़ेगा क्या कृषि मंत्री जी?

जब सब राजनीतिक रोटी सेकी रहे थे तो समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव क्यों चुप रहते उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ अपनी भड़ास मिटाते हुए कह दिया कि सियासत तू है कमाल, उठाके रास्ते में दीवार, बिछाकर कंटीले तार, कहती है आ करें बात।

बहरहाल सरकार ने पहले ही ऐलान कर रखा है कि लाल किला पर तांडव करने वाले दिल्ली में दंगा करने वाले और राष्ट्रध्वज का अपमान करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे वैसे में पुलिस पर हमला करने वाले और जिन पर मुकदमे चल रहे हैं। दिल्ली में दंगाइयों के फोटो भी पुलिस ने जारी कर दिए हैं। स्पेशल टीम जांच में लगी हुई है। कई किसान नेताओं के नाम भी एफ आई आर दर्ज है। पुलिस ने सरकारी संपत्ति नुकसान पहुंचाने, पुलिस के काम में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने सहित कई मामले दर्ज किए हैं। कई को इस आरोप में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। वही किसान नेता सरकार से बातचीत से पहले पकड़े गए लोगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। पंजाब हरियाणा राजस्थान और उत्तर प्रदेश सभी में किसान आंदोलन को लेकर राजनीति गर्म है हर कोई अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहा है। वहीं कई राज्यों में चुनाव होने वाले भी है। जिससे ऐसा लगता है कि किसान आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है क्योंकि पहले किसानों ने कहा था कि वह इसे राजनीतिक रंग नहीं देंगे लेकिन अब रोज 26 जनवरी की हिंसक घटना के बाद राजनीतिक दल के नेता किसान नेताओं से मिल रहे हैं और अपनी राजनीतिक जमीन तलाश कर रहे हैं। देखना है आगे क्या क्या होता है। बॉर्डर पर देश भक्ति गीत भी बज रहे हैं।