भाजपा में मचा कोहराम, सर्वदलीय बैठक में विस अध्यक्ष ने बतौर प्रतिपक्ष नेता बाबूलाल को नहीं बुलाया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा…..

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रांची: बजट सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा सर्वदलीय बैठक में बतौर प्रतिपक्ष के नेता के तौर पर विपक्ष भाजपा की ओर से बाबूलाल मरांडी को नहीं बुलाया गया उनकी जगह पूर्व मंत्री सीपी सिंह को आमंत्रित किया गया। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने बतौर झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता के तौर पर सर्वदलीय बैठक में प्रदीप यादव को बुलाकर झारखंड की राजनीति में एक तरह से कोहराम मचा दिया। चर्चा है कि भविष्य में झारखंड की राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक पैंतरा बाजी चरम पर रहेगी। इसके संकेत अभी से ही मिलने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर 26 मार्च को राज्यसभा के 2 सीटों के लिए चुनाव भी करीब है। राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि महागठबंधन दोनों सीटें अपने कब्जे में करना चाहती है वहीं भारतीय जनता पार्टी भी राज्यसभा की कम से कम 1 सीट हासिल करना चाहती है वैसे में राज्यसभा चुनाव के पहले ही झारखंड की राजनीति एक बार फिर से गरमा गई।

इधर खबरों के अनुसार इस मसले पर झारखंड प्रदेश भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि स्पीकर को भावना से उठकर काम करना चाहिए भारतीय जनता पार्टी की बैठक हुई थी उसमें संवैधानिक तरीके से बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है इस बात की सूचना विधानसभा अध्यक्ष को भी दे दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष को निष्पक्ष रहते हुए बाबूलाल मरांडी को बैठक में बुलाना चाहिए। वहीं पूर्व मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता सीपी सिंह का कहना है कि जब पार्टी की तरफ से बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है विधानसभा की बैठक में विधायक दल के नेता के तौर पर वह कैसे जा सकते हैं। यदि विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हुआ होता तो वे अवश्य जाते।

सूत्रों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने इस मामले में कहा कि अभी तक मुझे मालूम नहीं है कि सीपी सिंह ने बैठक में आने से मना किया है या नहीं। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से जितने कार्यक्रम हुए हैं उनकी जानकारी दी गई है। विधानसभा के तरफ से जो न्याय संगत होगा वह किया जाएगा।

बहरहाल अभी बाबूलाल मरांडी की राह मुश्किल ही है आसान नहीं दिखाई पड़ रही है क्योंकि एक और झारखंड विकास मोर्चा का कांग्रेस में विलय का दावा प्रदीप यादव कर रहे हैं और अपनी झाविमो को ही असली झाविमो बताने पर तुले हुए हैं और बाबूलाल मरांडी जो महज अपने स्वयं विधायक झाविमो का विलय भारतीय जनता पार्टी में करा चुके हैं और इसे ही असली झाविमो का दावा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह राजनीतिक जंग अगले विधानसभा चुनाव तक भी चलने की राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा है।