महिला दिवस पर विशेष: नरगिस का सफर

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झारखंड (कोडरमा) :12 वर्ष में शादी; 15 वर्ष में मां बनीं नरगिस, अब 20 गांव में बाल विवाह रोकथाम के लिए कर रही हैं काम ,नरगिस कोडरमा में कई किशोरियां लीडर के रूप में उभर कर आगे आई हैं। नरगिस का जन्म झारखण्ड के छोटे से शहर चक्रधरपुर में हुआ और उनके पिता पुलिस विभाग में थे।

शादी मात्र 12 साल कि उम्र में कर दी गई। नरगिस को पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन बाल-विवाह होने के कारण पढाई जारी नहीं कर पाई, फिर भी वह परिवार से छुपते-छुपाते पढाई करती थी। 15 साल कि उम्र में मां बनी। महिलाओं के जीवन में बहुत कठिनाइयां हैं, लेकिन महिलाएं अगर आंसू के बजाए जीवन को संघर्ष का मूलमंत्र मानकर आगे आएंगी तो निश्चय ही कामयाब होगी। यह मानना है सृजन महिला विकास मंच की सचिव नरगिस का। उन्होंने छिप-छिपकर पढ़ाई की, पति का साथ मिला, न्याय और हक के लिए संस्था बनाई। उन्होंने बाल मंच व किशोरी समूह के माध्यम से किशोरियों को जेंडर साथी व सक्रिय सदस्य के रूप में थिएटर कार्यक्रम, फुटबॉल, कब्बडी, जीवन कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ाव स्थापित कर और एक मंच प्रदान करके नेतृत्व क्षमता का विकास कर रही है।

नरगिस को वर्ष 2012 में झारखण्ड रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। नरगिस वर्तमान में झारखण्ड के दो जिला पश्चिमी सिंहभूम व कोडरमा में काम कर रही हैं।