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मोदी डिटर्जेंट लाएगी डबल इंजन की सरकार!

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जनता खामोश, प्रत्याशियों में नहीं झलक रही फूल कॉन्फिडेंस

सतीश सिन्हा

जमशेदपुर: पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी से बगावत कर निर्दलीय पर्चा भरने वाले भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता व मंत्री सरयू राय ने टिकट न मिलने के बाद यह कह कर खूब सुर्खियां बटोरी थी कि “झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर ‘दास’ नहीं रघुवर ‘दाग’ हैं’ मैं नहीं चाहता कि झारखंड के तीसरे मुख्यमंत्री जेल जाएं”यह बयान मीडिया पर काफी चर्चित रहा और तो और सरयू राय ने यहां तक कह डाला था कि रघुवर दास पर लगे दाग ऐसे दाग हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह डिटर्जेंट भी नहीं धो सकते हैं।

वैसे में आज यानी मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित करने आ रहे हैैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमशेदपुर में सभा संबोधित करने आने की खबर के बाद से यह चर्चा जोरदार छिड़ी हुई है कि क्या मोदी डिटर्जेंट रघुवर पर जो सरयू राय द्वारा लगाए गए कथित दाग को मिटा सकता है या शाह डिटर्जेंट की भी जरूरत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा दिए गए आज के वक्तव्य पर भी सरयू राय की पैनी नजर रहेगी।

सूत्रों का कहना है की अगली रणनीति सरयू राय जो कि एक मजे हुए राजनीतिज्ञ माने जाते हैं लेकिन जिन्हें उम्मीद ही नहीं थी की उन्हें भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर पूर्वी या पश्चिमी विधानसभा सीट से टिकट ही नहीं देगी वरना वो पहले ही अपनी रणनीति तैयार कर कुछ अलग ही कर जाने की कूवत रखते हैं क्योंकि इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो लालू यादव जैसे चतुर और दबंग राजनीतिज्ञ जो आज जेल की सजा काट रहे हैं उनका राजनीतिक कैरियर लगभग चौपट ही हो चला है शरीर भी जवाब दे रहा है यह उनके कर्मों की सजा हो या सरयू राय जैसे दृढ़ निश्चयी राजनीतिज्ञ की पहल का ही नतीजा माना जाता है।

वैसे भी इस बार झारखंड के विधानसभा चुनाव में दल बदल कुछ इस तरह से कि किसी भी दल के प्रत्याशी में नहीं है फूल कॉन्फिडेंस।

सबसे खास बात यह है इस बार के झारखंड के विधानसभा चुनाव में किसी दल के प्रत्याशी अपनी जीत का ऐलान फूल कॉन्फिडेंस से नहीं करने की स्थिति में है इसका मुख्य वजह यह बताया जाता है कि इस बार के झारखंड विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए दल बदल एक दलदल जैसा बन गया है ऐसी स्थिति में जब टिकट के लिए स्थिति है तो मतगणना के बाद सरकार बनाने के लिए क्या स्थिति होगी यह सहजता से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कहीं ऐसा ना हो कि महाराष्ट्र से भी गंदी राजनीति यहां भी देखने को मिले।

पशोपेश में है जनता और प्रत्याशी

वहीं दूसरी ओर जनता भी पशोपेश में है और प्रत्याशी भी पशोपेश में है क्योंकि कल तक जो भाजपा में थे आज झारखंड मुक्ति मोर्चा में चले गए जो झारखंड मुक्ति मोर्चा में थे वे झाविमो में चले गए और झाविमो वाले आजसू में चले गए यह तो केवल बतौर उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है राजद और कांग्रेस की भी स्थिति यही रही जिसके कारण एक दल से दूसरे दल में जाने वाले नेता दूसरे दल को कैसे कोसे यह समझ नहीं पा रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि ये पब्लिक है सब जानती है ऐसी स्थिति में जब राजनीतिक दलों के नेताओं का नैतिक पतन स्पष्ट लोगों के सामने आ रहा है वह भी बैलट के माध्यम से क्या करेगी यह कहना मुश्किल है। वहीं फिर से डबल इंजन की सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से लेकर भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता मंत्री चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं दूसरी ओर और अन्य पार्टियां जैसे झामुमो झाविमो राजद कांग्रेस व अन्य भी झारखंड में अपना वर्चस्व स्थापित करने या फिर से अपना रुतबा कायम करने के लिए चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। देखना है आगे क्या होता है।

बहरहाल प्रजातंत्र में जनता ही जनार्दन होती है जनता किसके पक्ष में मत देगी यह देखना होगा और नोटा बटन को भी गिनती करनी होगी ऐसी चर्चा है।

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