मोमेंटम झारखंड घोटाला : एक्शन में ACB, रघुवर दास सहित कई अधिकारियो पर गिरेगी गाज

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सत्यम जायसवाल (संपादक)

वार्ता स्पेशल : आपको रघुवर राज्य में हुए मोमेंटम झारखंड ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2017 तो याद ही होगा। रहना भी चाहिए क्यों कि इसी मोमेंटम झारखंड के तहत विदेशी कंपनियां झारखंड में निवेश करने वाली थीं। झारखण्ड के हर युवा ने रोजगार पाने का सपना देखा था। सपना सच होता भी प्रतीत हो रहा था क्यों कि सपनों वाली बात तो अब हक़ीक़त हो गयी थी। हाथी उड़ाए जा रहे थे। इस ओर किसी का ज्यादा ध्यान नहीं गया क्यों कि हर कोई अपने आने वाले सुनहरे भविष्य की कल्पना में गोते लगा रहा था। आप सोच रहे होंगे कि मैं आपको पिछले सरकार की इस पुरानी बात को क्यों बता रहा हूँ!

पूर्व सीएम रघुवर दास सहित कई अधिकारियो पर प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध

दरअसल मोमेंटम झारखंड ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2017 में जो करोडो रूपये खर्च हुए थे उसके फायदे या नुकसान पर बिना टिपण्णी किये हुए मैं सीधा घोटाले पर आता हूँ। जी हाँ कुछ दिनों पूर्व पंकज कुमार यादव के द्वारा मोमेंटम झारखंड घोटालों मामले में हाइकोर्ट में पीआइएल दायर की गयी थी। जहां से उन्हें माननीय न्यायालय ने मामले को लेकर एसीबी में जाने का रास्ता दिखाया। उसके बाद पंकज यादव ने घोटाले की शिकायत एसीबी से की। शिकायतकर्ता पंकज यादव ने अपनी शिकायत में इसके लिए पूर्व सीएम रघुवर दास, पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, उद्योग निदेशक के रवि कुमार, कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राहुल सिंह, सीएम के तत्कालीन प्रधान सचिव संजय कुमार, सुमित कुमार सहित अन्य लोगों को जिम्मेवार ठहराते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है।

निगरानी विभाग के अनुमति का इंतजार

ताज़ा ख़बर के अनुसार मोमेंटम झारखंड ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2017 में घोटाले से संबंधित शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पास भेज दी गयी है। शिकायत पर विभाग और सरकार से अनुमति मिलने के बाद एसीबी द्वारा मामले में प्रांरभिक जांच शुरू कर दी जायेगी। जांच के दौरान घोटाले से संबंधित तथ्य आने के बाद एसीबी की ओर से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे अनुसंधान के लिए अनुमति ली जायेगी।

8.50 करोड़ के बजट को बढ़ा कर 100 करोड़ कर दिया

शिकायतकर्ता पंकज यादव ने दावा किया है कि समिट का आयोजन 16-17 फरवरी 2017 को हुआ था। इसका बजट 8.50 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 16.94 करोड़ किया गया। फिर इसे बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया गया, जबकि इसकी मंजूरी कैबिनेट से नहीं ली गयी। खर्च 8.50 से बढ़ाकर लगभग 17 करोड़ किये जाने पर तत्कालीन उद्योग निदेशक ने भी गहरा एतराज जताया था। इसमें आश्चर्यजनक बात यह है कि कई ऐसे उद्योगों ने निवेश करने का प्रस्ताव दिया था, जो पहले से ही यहां काम कर रहे थे। शिकायत में इस बात का उल्लेख भी है 220790 करोड़ निवेश के प्रस्ताव मिलने की बात महज छलावा साबित हुई।