रांची के सैनिक मार्केट का अभी तक नक्शा ही पास नहीं और सैनिक मार्केट के निदेशक की नियुक्ति का मामला पहुंचा हाई कोर्ट

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रांची- सैनिक मार्केट का अभी तक नक्शा ही पास नहीं हुआ है। संयुक्त बिहार के दौरान सैनिक मार्केट का निर्माण 1988-89 में हुआ था। उस दौरान नक्शा पास नहीं हुआ था। इसके बाद वर्ष 2011 में तत्कालीन आरआरडीए के अध्यक्ष सह उपायुक्त केके सोन ने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि ऐसे सभी सरकारी भवन, जिनका नक्शा पास नहीं हुआ है। वे नगर निगम से नक्शा पास करा लें। इसके बाद सैनिक मार्केट के पदाधिकारियों नक्शा पास कराने की कोई जहमत नहीं उठाई है। सैनिक मार्केट में करीब दो सौ से दुकानें है। मार्केट का नक्शा पास तो है नहीं, लेकिन यहां पर कई दुकानों ने अपने हिसाब से निर्माण कर लिया है। इस मामले को याचिका में उठाया गया है।

रांची के मेनरोड स्थित सैनिक मार्केट के संचालन के लिए सैनिक कल्याण निदेशालय बनाया गया है। इसके निदेशक वीजी पाठक की नियुक्ति को गलत बताते हुए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि वीजी पाठक ने पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। लेकिन नियमों की अनदेखी करते हुए अभी भी वे इस पद पर बने हुए हैं।जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं हो सकता है। इसलिए उन्हें निदेशक पद से हटाने की मांग की गई है। निदेशक की नियुक्ति के लिए लगभग छह माह पहले विज्ञापन जारी किया गया है, लेकिन मिलीभगत कर नए निदेशक की नियुक्ति नहीं होने दी जा रही है। इस संबंध में कर्नल पीके सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। निदेशक वीजी पाठक को हटाने की मांग के अलावा यहां पर हुई नियुक्ति सहित दुकानों के किराए में वित्तीय अनियमितता का भी मुद्दा उठाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कई ऐसे कर्मी हैं, जो वर्षों से यहां पर जमे हुए हैं।