राज्यसभा की एक सीट महागठबंधन का कन्फ़र्म और दूसरे सीट के लिए भाजपा का दांव किस पर देखिए…

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रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 का ऐसा परिणाम आया कि क्या पक्ष और क्या विपक्ष दोनों के विधायकों की वैल्यू उतनी नजर नहीं आई जितना पहले की चुनाव में हुआ करती थी इसका मुख्य वजह यह बताया जा रहा है कि महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला जबकि फिलहाल विपक्ष में तैनात जो कि पूर्व सत्ता में थी उस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला इसका मुख्य कारण यह था कि भारतीय जनता पार्टी और आजसू में गठजोड़ नहीं था। खास बात यह रही कि ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन यानी आजसू जो कि पिछले कई दशकों के विधानसभा चुनाव में हमेशा निर्णायक भूमिका में रहे और जिसकी सत्ता रही उसके साथ चिपके रहे और उनका वजूद बना रहा और उनके विधायकों की पूछ भी बनी रही लेकिन पहली बार ऐसा हुआ की आजसू विधायकों की पूछ इस बार नहीं हुई लेकिन राज्यसभा के खाली हो रही 2 सीटों के उपचुनाव में सबकी निगाहें आजसू के दो विधायक पर टिकी हुई है और आजसू विधायकों की वैल्यू बढ़ी हुई है। एक ओर महागठबंधन राज्यसभा की 1 सीट कंफर्म है लेकिन दूसरी सीट के लिए भाजपा को नाको चने चबवाना चाहती है। वैसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी एक सीट के लिए दमदार प्रत्याशी देना चाहती है।

खबरों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश या पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज्यसभा के बिसात पर मोहरा बना सकती है।81सीट वाली झारखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास बाबूलाल को मिलाकर कुल 26 विधायक हैं। ऐसे में राज्यसभा की 1सीट जीतने के लिए 2 विधायकों की जरूरत पड़ेगी।राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा में राज्यसभा के प्रत्येक सीट के लिए 28 विधायकों की जरूरत होगी। वैसी स्थिति में फिलहाल सत्ता पक्ष के पास 47 विधायक जिसमें झामुमो कांग्रेस और राजद शामिल हैं। यदि झाविमो से आए प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को इसमें मिला लिया जाए कुल विधायकों की संख्या 49 हो जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और सरयू राय का सहयोग सत्ता पक्ष को मिलने की पुरजोर संभावना है। यदि इनका सहयोग भी मिलता है तो कुल विधायकों की संख्या 51 हो जाएगी। इसके बावजूद दोनों सीटों पर महागठबंधन को जीत हासिल करने के लिए 56 विधायकों की जरूरत होगी‌।

बहरहाल भाजपा को एक सीट साधने के लिए आजसू के दो विधायकों की जरूरत होगी और महागठबंधन को भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए भी आजसू की जरूरत होगी।