राज्य के 2 जिलों में लगातार जारी है मासूम बच्चों और लोगों की मौत, स्वास्थ विभाग में हड़कंप

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झारखंड : लातेहार और गिरिडीह जिले में पिछले कुछ दिनों से मासूम बच्चों और लोगों की मौत की घटना ने कोहराम मचा रखा है। पहली घटना गिरिडीह जिले के सरिया में शनिवार को बीमारी से तीन और लोगों की मौत हो गई। तीन दिनों के अंदर छह लोगों की मौत हो चुकी है। मौत से पहले सभी ने सीने में दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत की। इसी बीमारी से गांव के पांच अन्य लोगों का इलाज चल रहा है। इनका इलाज रांची और हजारीबाग में हो रहा है। शनिवार को दम तोड़ने वालों में मुकेश रजक नाम के युवक है। यह डेढ़ माह पहले मुंबई से आए थे। इनके दादा बासुदेव रजक की एक दिन पहले ही मौत हुई थी। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंच गई और कैंप करके लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। गांव में दहशत का माहौल है। लोग नाक और मुंह बांध कर रह रहे हैं। बता दें कि जिले के देवरी के गादीकला में पांच दिनों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है

तीन महीने के अंदर सात बच्चों की अज्ञात बीमारी से मौत

वहीं लातेहार जिले के हेरहंज प्रखंड के सेरनदाग पंचायत में तीन महीने के अंदर सात बच्चों की अज्ञात बीमारी से मौत की खबर के बाद जिला स्वास्थ विभाग हरकत में आ गया है। सिविल सर्जन डॉक्टर एसपी शर्मा मेडिकल टीम के साथ शनिवार को प्रभावित गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान डॉक्टर अशोक ओड़िया ने गांव के 21 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। तीन बच्चों के खून का नमूना लिया।

विभाग की ओर से बताया गया कि अज्ञात बीमारी से मरनेवाले बच्चों के मौत के कारणों को जानने के लिए तीन बच्चों के ब्लड सैंपल जांच के लिए रिम्स रांची भेजा जाएगा। बता दें कि नवंबर 2019 से अबतक गांव में पांच वर्ष से कम उम्र के सात बच्चों की मौत अज्ञात बीमारी से हो गई है। सिविल सर्जन डॉक्टर शर्मा ने बताया कि स्थानीय स्तर पर किए गए जांच से बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया जाएगा।

एएनएम और सहिया से मांगा स्पस्टीकरण

गांव में तीन माह में सात मासूम बच्चों के मौत मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन ने गांव की सहिया अनिता देवी और एएनएम अरुना टोप्पो से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सहिया को जानकारी देने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों तक इसकी सूचना नहीं दी गई। महिलाओं ने सहिया पर किसी भी स्थिति में सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया है।