शक्ति प्रदर्शन और भीड़ जुटान के जरिए 17 को भाजपा में विलय के साथ खिसकते जनाधार की क्षतिपूर्ति कर पाएंगे बाबूलाल?

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{वार्ता स्पेशल: रिपोर्ट सतीश सिन्हा की} कहा जाता है कि जिस पार्टी के पास जितने विधायक और सांसद है उसका उतना ही जनाधार मजबूत होता है लेकिन फिलहाल झारखंड विकास मोर्चा पार्टी के पास महज एक विधायक है वह भी झारखंड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी और सांसद के मामले में तो पार्टी शून्य है। वैसी स्थिति में झारखंड विकास मोर्चा का 17 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी में विलय होना तय माना जा रहा है। चर्चा है कि बाबूलाल मरांडी भी भाजपा में जाने के लिए बेचैन है। यहां तक कि उन्होंने भाजपा में जाने के राह में रोड़े बने पार्टी के दो विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है और अब एक ओर झारखंड विकास मोर्चा के कार्यकर्ताओं से अपील कर रहे हैं कि 17 फरवरी को रांची के प्रभात तारा मैदान में ज्यादा से ज्यादा संख्या में कार्यकर्ता शामिल हों। इस कार्य में उनका साथ भारतीय जनता पार्टी भी दे रही है झाविमो के भाजपा में विलय समारोह को सफल बनाने के लिए और सत्तापक्ष को अपना शक्ति दिखाने के लिए बाबूलाल के कंधे पर बंदूक रखकर भाजपा भी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर चर्चा है कि झाविमो के भाजपा में विलय से भारी संख्या में झाविमो के नेता कार्यकर्ता नया राजनीतिक आशियाना खोज रहे हैं।ऐसे नेता कार्यकर्ता कांग्रेस और झामुमो से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं। साथ ही झाविमो में भी भगदड़ मची हुई है।

झाविमो की लाज बचाने में जुटी भाजपा भी

वहीं दूसरी ओर खबरों के अनुसार एक ओर 17 फरवरी को रांची में झाविमो के भाजपा में विलय समारोह के लिए जमशेदपुर भाजपा महानगर ने 20 कोच बसे और 300 कार की बुकिंग कराई है महानगर भाजपा अध्यक्ष दिनेश कुमार के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी समारोह में शामिल होने वाले हैं। प्रदेश कमेटी ने अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को लाने का निर्देश भी दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी बहाने झाविमो की लाज बचाने के लिए भी लगभग 3000 भाजपा कार्यकर्ताओं को समारोह में ले जाने की तैयारी है। जो 17 फरवरी को साकची स्थित बौद्ध मंदिर मैदान में सुबह 8:00 बजे तक जमा होंगे।

वहीं इसके विपरीत झाविमो के भाजपा में विलय को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। कई अलग हो गए हैं अलग होने के मूड में है और तो और झारखंड विकास मोर्चा पार्टी में भी बगावत के सुर व्याप्त हो गए हैं। खबरों के अनुसार जमशेदपुर कदमा मंडल झाविमो अध्यक्ष बच्चे लाल भगत ने टीम के साथ इस्तीफा दे दिया है दर्जनों कार्यकर्ताओं नेताओं ने अपना इस्तीफा जिलाध्यक्ष बबुआ सिंह को सौंप दिया है।इस्तीफा देने वाले बच्चे लाल भगत का कहना है कि जिस पार्टी के खिलाफ झाविमो बना व भाजपा की नीतियों की आलोचना सदैव करते रहे पार्टी का विलय करना भय भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ तत्काल लड़ाई को बंद करने के जैसा है ऐसे में इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।वहीं इसके इतर झारखंड विकास मोर्चा के जनाधार खिसकने के और भी प्रमाण खुलकर सामने आने लगे हैं जिसमें भाजपा में जेवीएम के विलय के विरोध में सामाजिक संगठनों से जुड़े नेताओं ने बाबूलाल पर झारखंड की जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

कई पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं ने झाविमो से किया किनारा और कई है मूड में

सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी दयामनी बारला ने जारी प्रेस बयान में कहा- विगत 14 वर्षों में झारखंड विकास मोर्चा जल-जंगल-जमीन को लेकर आदिवासी-मूलवासी किसानों के साथ खड़ा था।इसको देखते हुए सामाजिक संगठनों ने विधानसभा चुनाव में झाविमो का साथ दिया था।अब झाविमो का भाजपा में विलय हो रहा।जल-जंगल-जमीन लूट एवं दलित-अल्पसंख्यकों के बीच धर्म जाति के नाम पर फूट डालो और राज्य करो जैसे नीति-सिंद्धांत के खिलाफ प्रेस बयान में आगे कहा कि इस विलय के विरोध में खूंटी, तोरपा और सिसई क्षेत्र के समाजिक संगठन अपने को झाविमो से अलग कर रहे हैं। साथ ही जनआंदोलनों का जमीन लूटने वाले एजेण्डे के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

वहीं लातेहार के सामाजिक कार्यकता जेम्स हेंरेज ने अपने बयान में कहा है कि बाबूलाल मरांडी ने उसूलों की राजनीति करने वाले व्यक्ति की रूप में भाजपा से अलग हो कर नयी पार्टी बनायी थी।अब भाजपा में बाबूलाल और उनकी पार्टी के शामिल होने के साथ झाविमो का विलय हो जायेगा।देश के ऐसे खराब हालात में भाजपा जैसी फासिस्ट व साम्प्रदायिक पार्टी के साथ पार्टी प्रमुख का हाथ मिलाना झारखण्डी जनता के अधिकारों को कुचलने का काम होगा।

भाजपा देशभर के आदिवासी इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों पर लगातार बेरहमी से हमले कर रही है. झारखण्ड को तो पिछले 5 सालों तक उत्थल-पुत्थल कर रख दिया था।भाजपा ने सीएए, एनपीआर, एनआरसी जैसे काले नियम-कानून लाकर देश भर में डर तथा अशान्ति का माहौल पैदा कर दिया है।इस कानून से अदिवासी समुदाय के लिये भी संकट खड़ा हो गया है।

इनके जैसे राजनीतिक नेताओं के भाजपा में जाने से ही खतरे बढ़े हैं। ऐसी विषम स्थिति में जेवीएम पार्टी से हम अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ स्वयं को अलग करने की घोषणा कर रहे हैं।

कई सामाजिक संगठनों ने झाविमो से काटा कन्नी, कई है तैयारी में

झाविमो से जुड़े हुए कई सामाजिक संगठनों ने झाविमो से अब रास्ता अपना किनारा कर लिया है वहीं कई संगठनों के द्वारा बाबूलाल मरांडी से 4 सवाल पूछे हैं।

सामाजिक संगठनों ने बाबूलाल से पूछे चार सवाल

जल, जंगल, जमीन से लोगों के विस्थापन के सवाल के साथ ही अडानी पवार प्लांट पर अब क्या है बाबूलाल जी का दृष्टिकोण?

क्या आदिवासियों को उजाड़ने के कॉर्पोरेट एजेंडे को लागू करने के लिए बाबूलाल जी समर्थन करेंगे?

आरएसएस का एजेंडा-आदिवासियों को हिन्दू बनाने के लिये काम करेंगे?

भय, भूख और बेरोजगारी के सवाल पर क्या रघुवर सरकार के एजेण्डे को लेकर काम करेंगे?

बहरहाल झारखंड विकास मोर्चा के पास एक ओर पाने के लिए तो भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी का दामन और प्रदेश का नेतृत्व करने का मौका मिल रहा है लेकिन दूसरी ओर किसी भी पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज जो जनाधार होता है वह कि सकता नजर आ रहा है। अब आगे देखना है कि बाबूलाल किस कदर अपने जनाधार को कायम रखने में सफल होते हैं और साथ ही बिना जनाधार के किस बलबूते पर भाजपा को भी लक्ष्य तक पहुंचाने में सफल होते हैं।