शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी में रखा खीर बन जाता है अमृत!

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सतीश सिन्हा
जमशेदपुर:शरद पूर्णिमा की पौराणिक मान्यता है कि इस दिन लोग ना सिर्फ चांद की पूजा करते हैं बल्कि अपने इष्ट देव की पूजा भी करते हैं। इस बार 13 अक्टूबर रविवार को पड़ रही है। हिन्दू मान्यताओं में अश्विन मास में आने वाली इस पूर्णिमा को लेकर कई मान्यताएं हैं। चर्चा होती रहती है कि चांद अपनी 16 कलाओं को पूरा करता है और इसी दिन चांद से अमृत की वर्षा होती है और शरद पूर्णिमा से ही शरद ऋतु की शुरूआत भी होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरद पूर्णिमा को काफी महत्वपूर्ण माना गया है।वैज्ञानिक दृष्टि से तर्कों से जानते हैं कि क्या सच में शरद पूर्णिमा पर आकाश से अमृत वर्षा होती है?साइंस की मानें तो आज ही के दिन आसमान से कुछ ऐसे रासायनिक तत्व गिरते हैं वो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। आप भी जानिए कैसे चांद की रोशनी में रखा खीर बन जाता है अमृत। जानकरों और वैज्ञानिक के मुताबिक दूध में लैक्टिक एसिड और अमृत जैसे तत्व होते हैं। यही तत्व जब चांद की रोशनी पाकर रिएक्शन करते हैं। यह तत्व सबसे ज्यादा चांद की किरणों को अवशोषित करता है। सिर्फ यही नहीं चावल में जो स्टार्च होते हैं वह इस प्रक्रिया को आसान बना देते हैं। जिससे जो तत्व तैयार होता है वो हमारे शरीर में कई तरह के रोगों को कम करता है। साथ ही हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। यही कारण रहा कि प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों ने इस दिन चांद की रोशनी में खीर रखकर खाने को कहा।

चांदी के बर्तन में खाएं खीर, फायदा होगा दुगना
इस दिन चांद की रोशनी में चांदी के बर्तन में खीर खाने से और भी फायदेमंद होता है। ऐसा माना जाता है कि चांदी में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है। यही कारण है कि चांदी के बर्तन में खीर रखने और उसी में खाने से खीर और भी अधिक फायदेमंद हो जाती है। मान्यता है कि चांदी के पात्र में खीर खाने से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं। पूर्णिमा की पौराणिक मान्यता की बात करें तो इस दिन लोग ना सिर्फ चांद की पूजा करते हैं बल्कि अपने इष्ट देव की पूजा भी करते हैं। बताया जाता है कि इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। साथ ही आज ही के दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा को महत्वपूर्ण माना जाता है।