सीएम हेमंत को चुनाव आयोग का बहुत बड़ा झटका! मांगी थी इतनी छूट,मिली बस इतनी मोहलत

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रांची: खनन लीज पट्टे में आरोपों से घिरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चुनाव आयोग की ओर से बड़ा झटका लगा है उन्होंने खनन लीज मामले में अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए 4 हफ्ते यानी 3 दिन की मोहलत चुनाव आयोग से मांगी थी लेकिन चुनाव आयोग ने महज 10 दिन ही उन्हें मोहलत दी है। चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस देखकर पूर्व में 10 मई तक जवाब देने को कहा था। जिसमें कहा गया था कि उनके ऊपर लगे आरोपों के मामले में उन पर क्यों नहीं करवाई की जाए। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां रूपी सोरेन का तबीयत खराब होने और उनका इलाज हैदराबाद में चलने के कारण वहां रहने और नोटिस का अध्ययन ना करने का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से 30 दिन का समय नोटिस पर जवाब देने के लिए मांगा था। जिस पर चुनाव आयोग ने सिर्फ 10 दिन यानी 20 मई तक ही उन्हें मोहलत दी है। अब उन्हें 20 मई तक चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देना होगा। यदि हेमंत सोरेन अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई में जो जवाब देंगे चुनाव आयोग उससे संतुष्ट होगा तो मुख्यमंत्री की सदन की सदस्यता बरकरार रहेगी वरना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में उनकी सदस्यता भी जा सकती है और तो और खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी भी खतरे में है।

बता दें कि चुनाव आयोग ने नोटिस में पूछा है कि खनन का पट्टा जारी करने के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो। जो प्रारंभिक दृष्टया में आरपी अधिनियम की धारा 91 का उल्लंघन है। धारा 9 A सरकारी अनुबंधों तहत किसी भी सदन के सदस्य को अयोग्य ठहराया जा सकता है।

बता दें कि इसके पूर्व इस मामले में राज्यपाल ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और विपक्ष के आरोपों के बाद राज्य के मुख्य सचिव को राजभवन तलब कर मामले से सभी संबंधित दस्तावेजों को सत्यापित कर सौंपने को कहा था। जिसके बाद मुख्य सचिव ने राज्यपाल को सभी संबंधित दस्तावेज सौंप दिए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यपाल ने दस्तावेजों को सीएम हेमंत के खिलाफ कार्यवाही के लिए पर्याप्त कथित रूप से बताया था। उसके बाद राज्यपाल ने चुनाव आयोग को दस्तावेज सौंपते हुए विशेष मामले में मंतव्य मांगा था। संभवत चुनाव आयोग के मंतव्य मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गाज गिरने की संभावना बढ़ गई है।

जानकार सूत्रों का कहना इसका वजह है बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पत्थर खदान लीज मामले में नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों ना की जाए।जिसके बाद अब मुख्यमंत्री के जवाब से यदि चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं होता है तो कार्रवाई तय है। चुनाव आयोग संतुष्ट न होने पर राज्यपाल को अपना मंतव्य भेज देगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पांच अप्रैल को ही सीएम ने आयोग को भेजे गये आवेदन में समय बढ़ाने का आग्रह किया था।अपना आवेदन चुनाव आयोग को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा था।सीएम श्री सोरेन ने आयोग से समय बढ़ाने के लिए तीन कारणों का उल्लेख किया है।

उन्होंने आयोग से कहा है कि दो मई को नोटिस मिली है और 10 मई तक जवाब देने के लिए कहा गया था। इतने कम समय में अपना पक्ष सही तरीके से पेश करना संभव नहीं है।

पत्र में कहा गया है कि आयोग ने अपनी नोटिस के साथ 600 पन्नों के उस दस्तावेज को भेजा है, जिसे मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को भेजा था।सभी दस्तावेज हिंदी में हैं और उनका पक्ष पेश करनेवाले अधिवक्ताओं को इसे सही-सही समझने के लिए अंग्रेजी में इसका अनुवाद कराना जरूरी है।इसमें वक्त लगेगा।

इसके अलावा उन्होंने अपनी मां की बीमारी का भी हवाला दिया है। पत्र में सीएम ने कहा है कि उनकी 67 वर्षीया मां पिछले आठ महीने से गंभीर रूप से बीमार हैं। 28 अप्रैल को उन्हें बेहतर इलाज के लिए हवाई मार्ग से रांची से हैदराबाद ले जाया गया। फिलहाल वह एआइजी हॉस्पीटल के आइसीयू में भर्ती हैं। उनके बेहतर इलाज और देखभाल के लिए उन्हें वहां रहना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर सीएम श्री सोरेन ने आयोग को भेजे पत्र में खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला काफी महत्वपूर्ण है। यह उनके राजनीतिक करियर और सामाजिक स्थिति से जुड़ा मामला है। समय अभाव के कारण वह अपने जवाब के लिए सक्षम वकीलों का चयन करने में भी फिलहाल थका समर्थ रहे हैं। इसलिए और वक्त चाहिए।

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