20 वो मानस महायज्ञ में उमड़ रही हजारों की भीड़

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संवाददाता- विवेक चौबे

गढ़वा : जिले के कांडी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत प्रसिद्ध सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल की कुल 24 एकड़ भूमि क्षेत्र से बाहर मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के तत्वधान में 28 फरवरी से ही 20वें मानस महायज्ञ प्रारम्भ है। यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही है, जहां कई प्रवचन कर्ताओं के द्वारा प्रवचन भी किया जा रहा है। खाश बात यह कि इस महायज्ञ में अयोध्या धाम के सिद्ध पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंथ श्री श्री 1008 श्री प्रेमशंकर दास जी महाराज के द्वारा रविवार को अभिमंत्रित औषधियुक्त प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान यज्ञ समिति के सभी सदस्यों के अलावे लाखों लोगों की भीड़ थी। भगवान के कई जयकारे लगाए जा रहे थे। महामंडलेश्वर के द्वारा एक-एक कर सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। यह सत्य है कि इस औषधियुक्त प्रसाद से सैकड़ों लोगों की असाध्य बीमारी तक ठीक हुई है। वहीं प्रवचन मंच पर मंचासीन महामंडलेश्वर ने कहा कि सत्यम, शिवम व सुंदरम ये समाज सुधारक तीन शब्द हैं। उक्त तीनों शब्दों को समाज से जोड़ते हुए उन्होंने कहा की पत्रकार, कथाकार व कलाकार समाज के स्तम्भ हैं। यदि सत्यम को पत्रकारिता, शिवम को कथाकार व सुंदरम को कलाकार से जोड़ा जाए तो समाज कभी बिगड़ नहीं पाएगा। तीनों स्तम्भ से समाज सही दिशा में जाएगा। उन्होंने कहा कि आज समाज में हर कुछ बिक रहा है। लाशों से लेकर कफ़न तक बिक रहा है। यहां इंसान तो इंसान ही, मंदिरों व मस्जिदों में भगवान को सरेआम बिकते देखा जा रहा है। धर्म भी बिक रहा है। दरोगा दीवाने के वर्दी तक बिक रहे हैं। गुंडा व गुंडागर्दी भी बिक रहे हैं। मानव हनन के जतन बिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस देश में हर कुछ बिक रहा है। हमारे देश व समाज के लिए यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। उन्होंने कहा कि हम जिस धर्म के अनुयाई हैं क्या लहसुन प्याज छोड़ देने से हम धर्मात्मा बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि शुद्ध आहार लेने से व्यवहार तो अच्छा होगा ही, बल्कि विचार व वाणी भी शुद्ध होगी। उन्होंने कहा कि कोई यह कह दे कि हम लहसुन प्याज नहीं खाते हैं, किंतु रिश्वत खाते हैं। क्या रिश्वत खाने से व्यवहार शुद्ध हो पाएगा। उन्होंने कहा कि कोई कह दे कि हम महात्मा हैं। पानी छानकर पीते हैं, लेकिन गरीबों का खून सीधे पी जाते हैं। क्या इससे शुद्ध हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यहां सभी सनातन धर्म के लोग बैठे हैं। सभी श्रोता याद रखें कि हमारा सनातन धर्म कोई मज़हब नहीं है। कोई संप्रदाय नहीं है। सनातन धर्म तो एक बेसिक जीवन पद्धति का नाम है। सनातन धर्म एक पवित्र उद्देश्य का नाम है। हमारा सनातन धर्म उदगार है। बता दें कि उन्होंने मानस की बात करते हुए राम का जीवन, चरित्र, व्यवहार, समाज, शिक्षा, राज्य सहित सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत टिपण्णी करते हुए उल्लेख किया। कथा के दौरान बीच बीच में विषय से सम्बंधित संस्कृत के कई श्लोक का भी उच्चारण किया गया। मौके पर- विकास समिति के अध्यक्ष- नरेश सिंह, सचिव- पंडित मुरलीधर मिश्र, उपाध्यक्ष- अरुण सिंह, संयोजक- प्रियरंजन सिन्हा, अंकेक्षक द्वय नवल किशोर तिवारी व नंदलाल दुबे, सुदामा सिंह, रमेश तिवारी सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।