गढ़वा: समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री दिनेश यादव की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई, गढ़वा द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी श्री अशोक नायक ने मिशन वात्सल्य योजना के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली एवं जिले में इसके तहत संचालित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी उपायुक्त को दी।
बैठक में बताया गया कि मिशन वात्सल्य का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित एवं संरक्षित बचपन प्रदान करना है। यह योजना पारिवारिक देखभाल को बढ़ावा देने, कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, संस्थागत एवं सामुदायिक संरक्षण व्यवस्था को सशक्त बनाने तथा बच्चों के जीवन, विकास, संरक्षण एवं सहभागिता को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, ताकि प्रत्येक बच्चा अपनी पूर्ण क्षमता प्राप्त कर सके।
इसके अंतर्गत विधि से संघर्षरत बच्चों, अनाथ, परित्यक्त, तस्करी पीड़ित, बाल श्रम, बाल विवाह, यौन शोषण (POCSO), सड़कों पर रहने वाले एवं अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की समुचित देखरेख एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जाता है। मिशन वात्सल्य के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु केंद्र से प्रखंड स्तर तक सुदृढ़ संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है।
संस्थागत देखभाल के अंतर्गत बाल गृह, पर्यवेक्षण गृह, विशेष गृह एवं पालक देखभाल जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से बच्चों को आश्रय, भोजन, शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वहीं गैर-संस्थागत देखभाल के तहत परिवार-आधारित एवं समुदाय-आधारित संरक्षण पर विशेष बल दिया जाता है।
जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा जनवरी 2025 से नवंबर 2025 की अवधि के दौरान यौन उत्पीड़न, बाल श्रम, बाल विवाह, गुमशुदा एवं भगोड़े बच्चे, अनफिट केस, अनाथ बच्चे, मानव तस्करी, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़े मामलों सहित कुल 858 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 425 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है।
बैठक में उपायुक्त श्री दिनेश यादव को अवगत कराया गया कि वर्तमान में जिले में 59 बच्चों को मिशन वात्सल्य योजना के तहत स्पॉन्सरशिप प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को ₹4000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वहीं जिला बाल कल्याण समिति द्वारा 266 अन्य बच्चों को स्पॉन्सरशिप प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई।
हालांकि, उपायुक्त श्री यादव ने उक्त 266 बच्चों के स्पॉन्सरशिप मामलों की भौतिक रूप से रैंडम जांच कराने के निर्देश पुलिस उपाधीक्षक यशोधरा, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग श्री पंकज कुमार गिरी एवं जिला बाल कल्याण समिति के सदस्यों को दिए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक एवं योग्य बच्चों तक ही पहुंचे और कार्यान्वयन पूरी तरह पारदर्शी रहे।
उपायुक्त ने कहा कि मिशन वात्सल्य सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जो अनाथ, एकल अनाथ, लापता, परित्यक्त, तस्करी पीड़ित, सड़कों पर रहने वाले, भीख मांगने वाले, कैदी के बच्चे, गंभीर बीमारी से पीड़ित अभिभावकों के बच्चे, यौन शोषण पीड़ित एवं आपदा प्रभावित परिवारों के बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करती है।
उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं जिला बाल कल्याण समिति के सदस्यों को निर्देश दिया कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से किया जाए, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को इसका लाभ मिल सके। बैठक के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने बच्चों के संरक्षण से जुड़ी समस्याओं से उपायुक्त को अवगत कराया, जिनके समाधान हेतु उपायुक्त द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।














