41 हजार टैबों से पूर्व सीएम रघुवर का वीडियो हटाने में 20 करोड़ का खर्च, शिक्षा मंत्री चिंतित

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{वार्ता स्पेशल : रिपोर्ट सतीश सिन्हा की} एक ओर झारखंड की नवगठित हेमंत सरकार का कहना है कि पूर्व रघुवर दास की सरकार ने उन्हें खाली खजाना सौंप दिया है। चर्चा यह भी है कि ऐसे में सरकार वित्तीय स्थिति को देखते हुए गैरजरूरी योजनाओं को फिलहाल बंद करने के मूड में है और श्वेत पत्र जारी करने की चर्चा भी पुरजोर चल रही है।

वही खबरों के मुताबिक राज्य की गड़बड़ आर्थिक स्थिति को लेकर वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव सहित ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की हेमंत सोरेन के साथ पिछले दिनों चर्चा होने की भी खबर है कि ऐसी स्थिति में लोक कल्याणकारी योजनाएं कैसे चलेंगी। वहीं दूसरी ओर झारखंड के स्कूली शिक्षा व साक्षरता मंत्री जगरनाथ महतो ने अब आदेश दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल के दौरान सरकारी स्कूलों को जो 41000 टैब दिए गए थे। उनमें से रघुवर दास के वीडियो हटाए जाएंगे। वही खबरों के अनुसार विभाग ने उनके आदेश के बाद इससे जुड़ी फाइलें मुख्य सचिव को भेज दी है।

वहीं जानकार सूत्र बताते हैं कि उक्त टैबों के निर्माण के समय ही रघुवर दास के वीडियो उसमें फीड किए गए थे जिन्हें हटाने में प्रति टैब लगभग 4000 से अधिक खर्च आ सकते हैं। इस तरह कुल मिलाकर कहा जाए तो राज्य सरकार को लगभग 16 करोड़ इसे हटाने के लिए खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में चर्चा होना लाजमी है की आखिर जिस सरकार का खजाना खाली है वह इसे कैसे वहन करेगी।जानकार सूत्रों के अनुसार ये टैब लगभग 13000 की दर से खरीदे गए थे। जिसमें रघुवर सरकार द्वारा कुल लगभग 53करोड़ खर्च होने की बात सामने आई है। इससे अब वीडियो हटाने का प्रति टैब 4000 खर्च होने की बात बताई जा रही है वहीं दूसरी ओर टैब स्कूलों से मंगा कर कंपनी को वापस भेजने और फिर स्कूलों को भेजने से जो खर्च आएगा वह उसमें और बढ़ोतरी कर देगा।

सूत्रों का यहां तक कहना है कि टैब आपूर्ति करने वाली एचपी कंपनी से जब वीडियो हटाने के बाबत विचार लिया गया कंपनी का कहना था इसमें बड़ी खर्च होगी। कंपनी ने इसमें लगभग 6 माह समय लगने की बात कही लेकिन खर्च कितनी आएगी यह राशि का ब्यौरा नहीं दिया।

बहरहाल स्थिति में ई विद्या वाहिनी के तहत स्कूलों की रिपोर्टिंग तथा शिक्षकों की उपस्थिति ठप हो जाने के कयास भी लगाए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर वीडियो हटाने में लगभग 10% टेपों के खराब होने की संभावना भी जताई जा रही है। इस स्थिति में सरकार को इतने और टैब खरीदने में लगभग 5 करोड़ रुपए तक खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है। साथ ही वीडियो हटाने, ट्रांसपोर्टिंग सहित नए टाइप खरीदने आदि में लगभग ₹20 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

दूसरी ओर खबरों के मुताबिक मंत्री जगरन्नाथ महतो के द्वारा अपने आदेश में इस पर प्रश्न चिन्ह लगाया गया है कि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में सदैव नहीं रह सकता ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री का टैब में वीडियो शामिल होना जांच का विषय है जिस पदाधिकारी ऐसा लिखित या मौखिक आदेश दिया है और जो इसके जिम्मेवार होंगे उन पर कार्रवाई होगी। मंत्री का यह भी कहना है कि उन्होंने खुद टैब खोला तो देखा कि पूर्व मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ाई कर रहे हैं।

वही खबरों के मुताबिक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने टैब खरीदने की जिम्मेदारी सूचना तकनीकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत जैप आईटी को दी थी।वहीं जब स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने टैब में वीडियो शामिल करने के आदेश की जानकारी जैप आईटी से मांगी तो जवाब मिला के तत्कालीन सचिव द्वारा ऐसा मौखिक आदेश मिला था हालांकि किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया गया। ऐसे में इन पैसों की बर्बादी और फिर एक बार पैसों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन होगा और किस पर कार्रवाई होगी यह प्रश्न चिन्ह है!