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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 36 पर था 1.19 करोड़ का इनाम

On: January 11, 2026 10:51 AM
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दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 63 नक्सलियों ने एक साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 18 महिला नक्सली भी शामिल हैं। इनमें से 36 नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। यह घटना हाल के वर्षों में दंतेवाड़ा में हुआ सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण मानी जा रही है, जिसे नक्सल विरोधी अभियान में एक अहम उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।


आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन उर्फ आजाद कड़ती और उसकी पत्नी सुमित्रा उर्फ द्रौपदी चापा शामिल हैं। दोनों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा 7 नक्सलियों पर 8 लाख रुपये, 7 पर 5 लाख रुपये, 8 पर 2 लाख रुपये और 11 नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। तीन अन्य नक्सली ऐसे भी थे, जिन पर 50-50 हजार रुपये का इनाम रखा गया था।


पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े और सक्रिय नक्सली नेता शामिल हैं। इनमें पक्लू उर्फ प्रदीप ओयाम (45) प्रमुख नाम है, जो कालाहांडी एरिया कमेटी का सचिव और डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) रह चुका है। वहीं पाकलू उर्फ रैनू भी डीवीसीएम के तौर पर सक्रिय था। छात्र संगठन से जुड़े अध्यक्ष मोहन ने भी हथियार डालकर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। इसके अलावा हंगी उर्फ राधिका लेकम, सुखराम ताती, पांडु मड़काम और सोमडु कड़ती जैसे कई सक्रिय कैडर भी सरेंडर करने वालों में शामिल हैं।


ये सभी नक्सली साउथ बस्तर डिवीजन, वेस्ट बस्तर डिवीजन और माड़ डिवीजन में सक्रिय थे। साथ ही ओडिशा से सटे सीमावर्ती इलाकों में भी नक्सली गतिविधियों में इनकी संलिप्तता रही है। लंबे समय से ये क्षेत्र नक्सल प्रभावित माने जाते रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर कैडर के आत्मसमर्पण से इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।


दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि सभी नक्सलियों ने राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ योजना के तहत आत्मसमर्पण किया है। इस योजना का उद्देश्य नक्सलियों को हिंसा के रास्ते से हटाकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सीआरपीएफ के अधिकारी भी मौजूद रहे।


सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकार की नीति के तहत तत्काल 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके बाद पुनर्वास योजना के अंतर्गत उन्हें आवास, रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े लाभ प्रदान किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है, ताकि आत्मसमर्पण करने वाले भविष्य में दोबारा हिंसा की ओर न लौटें।


सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण से नक्सली संगठन के ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचा है। साथ ही पुलिस को नक्सल नेटवर्क से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी मिली हैं, जो आने वाले समय में नक्सल विरोधी अभियानों को और मजबूत करेंगी। सरकार और प्रशासन इसे नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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