इस्लामाबाद/पेशावर: पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में एक बार फिर आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है। शनिवार सुबह बन्नू जिले की मिरयान तहसील में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकियों ने पाकिस्तानी सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया।
हमले में कम से कम 10 सैनिक मारे गए, जबकि 15 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। आईईडी धमाके और उसके बाद की गोलीबारी में सेना का एक वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (ISPR) ने हमले की पुष्टि की है।
घात लगाकर किया गया हमला
रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब सेना का काफिला अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाके से गुजर रहा था। लगभग 15 से 20 हथियारबंद आतंकियों ने सड़क किनारे छिपकर पहले आईईडी विस्फोट किया और फिर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, विस्फोट की आवाज मीलों दूर तक सुनाई दी, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। सोशल मीडिया पर सामने आई फुटेज में धुएं के गुबार और क्षतिग्रस्त सैन्य वाहन साफ दिखाई दे रहे हैं, जो हमले की गंभीरता को दर्शाते हैं।
टीटीपी की बढ़ती गतिविधियां
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला टीटीपी की बढ़ती सक्रियता का ताजा उदाहरण है। संगठन ने हाल के महीनों में खास तौर पर खैबर पख्तूनख्वा और वजीरिस्तान इलाकों में सेना को निशाना बनाना तेज कर दिया है।
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अब तक खैबर पख्तूनख्वा में 600 से अधिक आतंकी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें ज्यादातर सैन्य ठिकानों और चौकियों पर हमले हुए हैं।
लगातार हो रहे हमले
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले ही टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा की एक सैन्य चौकी पर कब्जा करने का दावा किया था। बताया जा रहा है कि तीव्र मुठभेड़ के बाद पाकिस्तानी सैनिकों को चौकी खाली करनी पड़ी।
इससे पहले सितंबर में वजीरिस्तान में हुए हमले में 12 सैनिक मारे गए थे, जबकि उसी महीने बन्नू में फेडरल कांस्टेबुलरी मुख्यालय पर हुए टीटीपी के आत्मघाती हमले में 6 जवानों की जान गई थी।
टीटीपी ने अपने बयान में कहा है कि पाकिस्तानी बल “न तो हमें चुनौती दे पाए और न ही चौकी को बचा सके।”
सुरक्षा स्थिति पर बढ़ी चिंता
इस हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान की सीमा के पास टीटीपी को लगातार मिल रहे ठिकाने पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ी चिंता का विषय हैं।
पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में आतंकवाद के खिलाफ “ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम” शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन बढ़ती घटनाओं ने इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।












