नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निठारी हत्याकांड से जुड़े अंतिम बचे मामले में आरोपी सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से बरी कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की तीन सदस्यीय पीठ ने कोली की क्युरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दी गई मौत की सजा और पूर्व फैसलों को रद्द कर दिया।
यह क्युरेटिव याचिका 2011 के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने सेशन कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा था। कोली ने दलील दी थी कि उसे निठारी कांड से जुड़े बाकी 12 मामलों में पहले ही बरी किया जा चुका है, इसलिए इस अंतिम मामले में भी उसे राहत दी जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि सभी परिस्थितियों को देखते हुए कोली को दोषमुक्त किया जाता है। अदालत ने 13 फरवरी 2009 के सेशन कोर्ट के फैसले और 11 अक्टूबर 2009 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 2011 के अपने आदेश और 28 अक्टूबर 2014 को दी गई पुनर्विचार याचिका खारिज करने वाले आदेश को भी निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि यदि सुरेंद्र कोली किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। इस फैसले के साथ निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में कोली को अब बरी कर दिया गया है।
नोएडा के निठारी गांव में वर्ष 2005–2006 के दौरान कई बच्चों और महिलाओं की हत्याएं सामने आई थीं, जिनसे पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। सुरेंद्र कोली और उसके नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंधेर पर इन हत्याओं और अत्याचारों के आरोप लगे थे। हालांकि बाद के वर्षों में कई मामलों में साक्ष्यों के अभाव में अदालतों ने दोनों को बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के अंतिम मामले में सुरेंद्र कोली को किया बरी, तत्काल रिहाई के आदेश












