रांची: झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी रांची पूरी तरह सांस्कृतिक रंगों में रंगी नजर आई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजकीय सम्मान के साथ भव्य ‘झारखंड जतरा मेला’ का शुभारंभ किया। अल्बर्ट एक्का चौक से लेकर शहीद चौक और बिरसा समाधि स्थल तक पारंपरिक वाद्य, जनजातीय नृत्य, सांस्कृतिक झांकियों और लोक-कलाओं के आकर्षक प्रदर्शन ने राजधानी की सड़कों को उत्सव स्थल में बदल दिया।

शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं पारंपरिक मांदर की थाप पर कदम मिलाते दिखाई दिए। उन्होंने कलाकारों की टोली के साथ जुलूस में हिस्सा लिया और पूरे आयोजन को अपने मोबाइल कैमरे में भी रिकॉर्ड किया। मुख्यमंत्री के शामिल होने से लोगों में उत्साह और बढ़ गया।
राजेंद्र चौक से शुरू हुआ जश्न
सुबह से ही राजेंद्र चौक पर भारी भीड़ उमड़ने लगी। यहां से जतरा मेला का जुलूस शुरू हुआ, जिसमें झारखंड की 32 जनजातियों का सांस्कृतिक वैभव एक साथ देखने को मिला। लगभग 4000 कलाकारों ने पारंपरिक पोशाकों में नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति देकर सबका ध्यान खींचा।
लोक-संस्कृति की अनूठी झलक
मेला में मुंडा समुदाय का सोहराय नृत्य, संथाली पारंपरिक नृत्य, उरांव का झूमर, हो जनजाति का करमा, असुर समुदाय का ढुमकुश, और बंगाल का प्रसिद्ध पुरुलिया छऊ नृत्य मुख्य आकर्षण रहे। कलाकारों की ताल, तान और रंग-बिरंगे परिधानों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बिरसा समाधि स्थल पर हुआ समापन
जतरा मेला का भव्य समापन बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर किया गया। यहां सभी जनजातियों की झांकियों और सांस्कृतिक समूहों ने अपनी अंतिम प्रस्तुति दी। वीर बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पूरे आयोजन का समापन राज्य की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव के सम्मान के साथ किया गया।
सांस्कृतिक विरासत का शानदार उत्सव
झारखंड स्थापना दिवस पर आयोजित यह जतरा मेला न केवल जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन रहा, बल्कि सामाजिक एकता और विविधता का भी संदेश देकर गया। राजधानी रांची में पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल रहा और लोग देर शाम तक रंगारंग प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।













