आंध्र प्रदेश:आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के पास जंगल में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिलने की खबर आ रही है।कई घंटे से चल रही मुठभेड़ के दौरान एक करोड़ का नक्सली कमांडर मादवी हिड़मा और उसकी पत्नी समेत 6 नक्सली ढेर हो गए हैं।
सुकमा से सटे आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम जिले के पास सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी। कई घंटों की फायरिंग के बाद एनकाउंटर में 6 नक्सली ढेर कर दिए गए हैं। नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच फायरिंग अभी भी जारी है।
पुलिस ने दी जानकारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह एनकाउंटर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर हुआ है। पुलिस को इन जंगलों में कई नक्सलियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। मुखबिरी के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आज सुबह से ही सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चल रही है। इस दौरान पुलिस ने सुकमा में भी 1 नक्सली को मार गिराया है। वहीं, आंध्र प्रदेश में हिड़मा समेत 6 नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है।
अल्लुरी सीताराम जिले के एसपी अमित बरदार के अनुसार,
आज सुबह 6:30-7 बजे के करीब मारेडुमिल्ली मंडल के जंगल में एनकाउंटर शुरू हुआ था। अब तक 6 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिली है। यह पुलिस और सुरक्षाबलों के द्वारा चलाया गया साझा ऑपरेशन है।
हिड़मा की पत्नी भी ढेर
बता दें कि माड़वी हिड़मा को सबसे खूंखार नक्सलियों में गिना जाता है। हिड़मा आम नागरिकों समेत सुरक्षाबलों पर हुए 26 नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है, जिसमें कई लोगों की जान भी गई है। हिड़मा पर पुलिस ने 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। हिड़मा के अलावा उसकी पत्नी राजे की भी एनकाउंटर में मौत हो गई है।
कौन था माड़वी हिड़मा?
हिड़मा का जन्म 1981 को सुकमा जिले में हुआ था। पीपुल्स लिब्रेशन की गुरिल्ला बटालियन का नेतृत्व करने के बाद वो सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बन गया था। हिड़मा बस्तर इलाके से इस कमेटी का अकेला सदस्य था। झीरम घाटी हमले के बाद हिड़मा का नाम पहली बार चर्चा में आया था। इसके बाद हिड़मा ने लगातार कई नक्सली हमलों को अंजाम दिया और दशकों तक उसके नाम की दहशत पूरे इलाके में देखने को मिलती थी।
और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली कमांडर मादवी हिडमा और उसकी पत्नी को गोली लगी और दोनों की मौत हो गई. आंध्र प्रदेश के अल्लूरी जिले और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने माओवादियों को पकड़ने के लिए सर्च अभियान चलाया था.
इसी दौरान नक्सलियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी.
मादवी हिडमा की उम्र 43 वर्ष थी. पिछले दो दशकों से सुरक्षा बलों के लिए वह चुनौती बना हुआ था. वह न सिर्फ PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख था, बल्कि सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का भी सबसे कम उम्र का सदस्य रहा था. उसकी रणनीतिक सोच और जंगलों में गुरिल्ला युद्ध की क्षमता ने उसे संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक बना दिया था.
सुकमा हमले का मास्टरमाइंड था
हिडमा का जन्म वर्ष 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती इलाके में हुआ था. बेहद कम उम्र में ही वह माओवादी संगठन से जुड़ गया और कमांडर बन गया. वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ के दरभा घाटी नरसंहार में वह मुख्य साजिशकर्ता था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे.
इसके अलावा 2017 में सुकमा में CRPF पर हुए घातक हमले में भी उसका मुख्य रोल था, जिसमें 25 जवान शहीद हुए थे. उसने कम से कम 26 बड़े हमलों की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया. उस पर एक करोड़ का इनाम था.
पत्नी भी नक्सल गतिविधियों में शामिल रही
आंध्र प्रदेश की पुलिस और विशेष बलों को लंबे समय से उसकी गतिविधियों के बारे में इनपुट मिल रहे थे. ताजा मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने गुप्त सूचना के आधार पर जंगल में घेरा डालकर ऑपरेशन शुरू किया. जवाबी फायरिंग में हिडमा और उसकी पत्नी मारे गए. उसकी पत्नी भी नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी और कई ऑपरेशनों में सक्रिय रही थी.
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हिडमा की मौत से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगेगा. वह न सिर्फ प्रमुख रणनीतिकार था, बल्कि दक्षिण बस्तर में संगठन की पकड़ बनाए रखने में उसकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती थी. उसकी मौत से माओवादियों का नेटवर्क कमजोर होगा और जंगलों में उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाने में आसानी होगी.










