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कलयुगी बेटों ने वृद्धाश्रम से मां का शव घर लाने से किया इनकार, कहा– ‘फ्रीजर में रखवा दो, शादी है… अपशकुन होगा’

On: November 25, 2025 5:13 PM
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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज थाना क्षेत्र से बेहद भावुक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां भरोहिया ग्राम पंचायत में रहने वाले एक वृद्ध दंपती की कहानी पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दी है। मां के निधन के बाद कलयुगी बेटों ने उसका शव घर लाने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि घर में शादी है, शव आएगा तो अपशकुन लगेगा, इसलिए उसे फ्रीजर में रखवा दिया जाए।

माता-पिता को घर छोड़ने पर कैसे मजबूर किया बच्चों ने

68 वर्षीय भुआल गुप्ता और उनकी पत्नी 65 वर्षीय शोभा देवी के 6 बच्चे हैं। दंपती ने बच्चों की परवरिश में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, लेकिन बड़े होने पर बच्चों ने उन्हें ही बोझ मान लिया। परिजनों ने वृद्ध मां–बाप को घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया, जिसके बाद दुखी होकर दंपती घर से निकल पड़े और राजघाट नदी के पास पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उन्हें समझाया और आश्रम में जाने की सलाह दी। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता रवि चौबे उन्हें अपने वृद्धा आश्रम ले आए, जहां वे पिछले कुछ महीनों से रह रहे थे।

अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत

आश्रम संचालक के अनुसार, 19 नवंबर को शोभा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। रात में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

छोटे बेटे की बेरुखी

शोभा देवी की मौत की जानकारी छोटे बेटे को दी गई। उसने फोन काटकर कहा कि भाई से बात करके बताएगा। कुछ देर बाद उसने वापस फोन करके कहा, “घर में भैया के लड़के की शादी है, शव आएगा तो अपशगुन होगा। फ्रीजर में रखवा दीजिए, 4 दिन बाद आकर अंतिम संस्कार करेंगे।”

यह सुनकर वृद्ध पिता का दिल टूट गया। वह फफक-फफक कर रोने लगे। आश्रम में मौजूद अन्य लोग भी इस जवाब को सुनकर दंग रह गए।

बेटियों ने निभाया फर्ज

जब बेटियों को मां की मौत और बेटों के इस अमानवीय रवैये की खबर मिली, तो वे तुरंत आश्रम पहुंचीं। बेटियों ने ही शव को अपने पास मंगवाया और अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी खुद संभाली। गांव वालों की राय पर तीनों बेटियों की मौजूदगी में मां को दफनाया गया।

लोगों ने बेटों को जमकर कोसा

घटना पूरे गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने बेटों की बेरुखी और अमानवीयता पर गहरा रोष जताया। लोगों ने बताया कि यही बेटों ने माता-पिता को पहले भी तानों और उपेक्षा के चलते घर से जाने पर मजबूर किया था।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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