सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले से आई ताज़ा रिपोर्टें चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। कभी जहां एचआईवी संक्रमण मुख्य रूप से 30 से 50 वर्ष की आयु वर्ग तक सीमित दिखाई देता था, वहीं अब नाबालिगों में भी इस लाइलाज बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह स्थिति पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा
जिले में इस समय लगभग 8,000 एचआईवी पॉजिटिव मरीज रजिस्टर्ड हैं। पुरुष और महिला मरीजों की संख्या लगभग बराबर है। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि 18 वर्ष से कम आयु के लगभग 400 बच्चे (252 लड़के और 135 लड़कियां) एचआईवी से संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इनमें अधिकांश बच्चों को संक्रमण उनके माता-पिता से जन्म के समय मिला है।
फिलहाल 4,954 मरीज सक्रिय हैं और सभी को सरकार द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी) दवाओं का लाभ मिल रहा है। हर महीने करीब 40 से 60 नए मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए जाते हैं और इलाज के लिए रजिस्टर होते हैं। ART सेंटर से हर महीने 5,000 से अधिक मरीज दवाएँ ले रहे हैं, जबकि कई मरीज इलाज के लिए दूसरे राज्यों में भी जाते हैं।
सीतामढ़ी बना ‘हाईलोड सेंटर’
तेजी से बढ़ती मरीजों की संख्या के कारण सीतामढ़ी का ART सेंटर अब राज्य में ‘हाईलोड सेंटर’ की श्रेणी में शामिल हो चुका है, यानी उन जिलों में जहां एचआईवी संक्रमितों की संख्या सबसे अधिक है।
जागरूकता की कमी है सबसे बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि संक्रमण फैलने का सबसे प्रमुख कारण है। लोगों में एचआईवी/एड्स को लेकर जानकारी का भारी अभाव, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भ्रांतियां और गलत धारणाएं, संक्रमण फैलने के तरीकों और रोकथाम के उपायों की सही जानकारी का न होना।
जागरूकता अभियान समय-समय पर चलाए जाने के बावजूद संक्रमितों की संख्या में खास कमी नहीं आ रही है। यह साफ संकेत है कि मौजूदा प्रयास पर्याप्त नहीं हैं और ज़रूरत है बड़े और व्यापक स्तर पर जमीनी कार्रवाई की।
एचआईवी की रोकथाम पूरी तरह संभव
विशेषज्ञों के अनुसार एचआईवी से बचाव 100% संभव है, यदि लोग निम्नलिखित सावधानियां अपनाएं। सुरक्षित यौन संबंध, रक्त चढ़ाने से पहले अनिवार्य जांच, संक्रमित सुई या ब्लेड के उपयोग से बचाव, गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच, ताकि जन्म के समय संक्रमण रोका जा सके।
सीतामढ़ी में एचआईवी मामलों में लगातार वृद्धि यह बताती है कि समस्या केवल मेडिकल नहीं, बल्कि सामाजिक और जागरूकता से जुड़ी है। समय रहते बड़े पैमाने पर सूचना, शिक्षा और रोकथाम से जुड़ी पहल नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सीतामढ़ी में HIV विस्फोट, कुल 8000 मरीज; 400 बच्चे संक्रमित














