बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 34 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है। सरेंडर करने वालों में 26 ऐसे नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दक्षिण सब जोनल ब्यूरो से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि इनमें तेलंगाना स्टेट कमेटी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB) डिवीजन के कैडर भी शामिल हैं।
इस समूह में 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रही थीं। अधिकारियों के मुताबिक, इन नक्सलियों ने सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
2024 में अब तक 824 नक्सली छोड़ चुके हैं हिंसा का रास्ता
बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से अब तक नक्सलवाद के खिलाफ लगातार ठोस कार्रवाई देखने को मिल रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में अब तक 824 नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं। वहीं, 1079 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 220 नक्सली मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। ये आंकड़े नक्सल नेटवर्क पर पड़ते दबाव और सरकार की रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
सरेंडर करने वालों को मिलेगी तात्कालिक आर्थिक सहायता
राज्य सरकार की पुनर्वास प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली कैडर को 50,000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही आगे चलकर उन्हें सुरक्षा, आजीविका, प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्समावेशन से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन की शुरुआत कर सकें।
नक्सलियों के इस बड़े आत्मसमर्पण पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि ‘पूना मारगेम’ नीति के तहत यह कदम बस्तर में शांति और विश्वास की दिशा में एक निर्णायक उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और लाल आतंक का रास्ता छोड़कर भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए इन नक्सली कैडरों का मुख्यधारा में लौटना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार ठोस और मानवीय प्रयास कर रही है।
‘पूना मारगेम’ नीति से बढ़ा भरोसा
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह साबित कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने का नहीं, बल्कि भयमुक्त और सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है।
उन्होंने भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागकर लोकतंत्र और विकास के साथ आगे बढ़ें। राज्य सरकार लौटने वाले हर व्यक्ति को नया भविष्य देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बस्तर में शांति की ओर एक और कदम
लगातार हो रहे आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से यह साफ संकेत मिल रहा है कि बस्तर क्षेत्र में शांति, विकास और विश्वास का माहौल धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में और भी नक्सली हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे, जिससे छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य और करीब आएगा।









