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जब एनकाउंटर का दे दिया गया आदेश, जान बचाने के लिए साइकिल से दिल्ली भागे थे मुलायम सिंह यादव; जानें पूरा वाकया

On: December 22, 2025 12:41 PM
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 1980 के दशक की शुरुआत एक बेहद उथल-पुथल भरा दौर था। उसी दौर से जुड़ा एक प्रसंग आज भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहता है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के दस्यु उन्मूलन अभियान के बीच समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को लेकर गंभीर आरोप सामने आए और उनकी सुरक्षा को लेकर संकट खड़ा हो गया।


दस्यु उन्मूलन अभियान और बढ़ता टकराव


1981–82 के आसपास विश्वनाथ प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश में डकैतों के खिलाफ सख्त अभियान चला रहे थे। इसी दौरान प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई कि मुलायम सिंह यादव के कुछ सक्रिय दस्यु गिरोहों से कथित संबंध हैं। उस समय यह भी कहा गया कि फूलन देवी सहित कई डकैतों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा। इन आरोपों को लेकर विश्वनाथ प्रताप सिंह और मुलायम सिंह यादव के बीच टकराव खुलकर सामने आने लगा। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मुलायम सिंह यादव के एनकाउंटर का आदेश दे दिया था। मुलायम सिंह यादव डकैत गिरोहों से न सिर्फ सक्रिय संबंध थे बल्कि वो डकैती और हत्या के आरोपों से भी घिरे हुए थे। विश्वनाथ प्रताप सिंह का मानना था कि मुलायम सिंह यादव फूलन देवी सहित तमाम डकैतों को न सिर्फ संरक्षण देते थे बल्कि उन से लूट का हिस्सा भी लेते थे।

एनकाउंटर की आशंका और इटावा से पलायन


इसी पृष्ठभूमि में यह दावा किया जाता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को मुलायम सिंह यादव के खिलाफ कार्रवाई के संकेत मिले। इटावा पुलिस के जरिए यह सूचना मुलायम सिंह यादव तक पहुंच गई कि उनके एनकाउंटर की आशंका है। बताया जाता है कि इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने इटावा छोड़ने में देर नहीं की। कार या ट्रेन के बजाय उन्होंने गांव-गांव और खेतों की पगडंडियों से होते हुए साइकिल द्वारा दिल्ली का रास्ता चुना, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।


चौधरी चरण सिंह की शरण


दिल्ली पहुंचकर मुलायम सिंह यादव सीधे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के निवास पर पहुंचे। मुलायम सिंह यादव चौधरी चरण सिंह के कदमों में पड़ गए और कहा मेरी जान बचा लीजिए… विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मेरे एनकाउंटर का आदेश दे दिया है। इसके तुरंत बाद चौधरी चरण सिंह ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया गया। मुलायम सिंह यादव को लोकदल के उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल का नेता घोषित कर दिया गया। इस कदम के बाद, जो पुलिस उन्हें तलाश रही थी, वही उनकी सुरक्षा में तैनात हो गई। इसके बावजूद भी मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में खुद को सुरक्षित नहीं पाते थे। डर के मारे दिल्ली में चौधरी चरण सिंह के घर में ही रहते रहे।


कुछ समय बाद एक अंग्रेजी अखबार में लखनऊ डेटलाइन से प्रकाशित एक रिपोर्ट ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। वरिष्ठ पत्रकार एस.के. त्रिपाठी की बाइलाइन वाली इस खबर में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दर्ज कथित मामलों, हिस्ट्रीशीट नंबर और आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख किया गया था।
इस रिपोर्ट के बाद लोकदल के भीतर भी असहजता बढ़ी। चौधरी चरण सिंह कथित तौर पर नाराज़ हुए और 1984 के आम चुनाव में मुलायम सिंह यादव का सांसद टिकट काट दिया गया। उस समय के.सी. त्यागी और हरिकेश प्रताप बहादुर सिंह जैसे नेता भी इस मुद्दे पर मुखर नजर आए।


बेहमई कांड और सत्ता परिवर्तन


28 जून 1982 को बेहमई गांव में हुए सामूहिक हत्याकांड के बाद राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल गए। फूलन देवी कांड के बाद दस्यु उन्मूलन अभियान सवालों के घेरे में आया और विश्वनाथ प्रताप सिंह को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। सरकार के पतन के साथ ही मुलायम सिंह यादव पर मंडरा रहा खतरा भी कम हुआ और वे खुलकर राजनीति में सक्रिय हुए।


बाद के वर्षों में जारी रही राजनीतिक तल्खी


हालांकि समय बदला, लेकिन वी.पी. सिंह और मुलायम सिंह यादव के बीच तल्खी खत्म नहीं हुई। डइया ट्रस्ट का मुद्दा हो या बाद में केंद्र की राजनीति, दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार बने रहे। मंडल आयोग, राम मंदिर आंदोलन और लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा जैसे बड़े घटनाक्रमों में भी दोनों की राजनीति अलग-अलग राहों पर चलती दिखी।


इतिहास का एक विवादित अध्याय


यह पूरा घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति के उस दौर की तस्वीर पेश करता है, जब सत्ता, सुरक्षा और सामाजिक समीकरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े थे। समर्थक जहां इसे मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक सूझ-बूझ और संघर्ष की कहानी बताते हैं, वहीं आलोचक इसे आरोपों और विवादों से घिरा अध्याय मानते हैं।
सच जो भी हो, यह प्रसंग आज भी भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित और बहसतलब किस्सों में गिना जाता है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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