नई दिल्ली: देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने शुक्रवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को 2,434 करोड़ रुपये की कर्जदार धोखाधड़ी की सूचना दी है। यह मामला SREI ग्रुप की दो कंपनियों SREI इक्विपमेंट फाइनेंस और SREI इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस से जुड़ा हुआ है, जिनके पुराने प्रमोटर इसमें शामिल बताए जा रहे हैं।
PNB द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, SEFL से संबंधित धोखाधड़ी की राशि 1,240.94 करोड़ रुपये है, जबकि SIFL से जुड़ा मामला 1,193.06 करोड़ रुपये का है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों मामलों में संभावित नुकसान को देखते हुए पूरी राशि का प्रावधान (Provisioning) पहले ही कर लिया गया है, जिससे बैंक की वित्तीय स्थिति पर तत्काल कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
NCLT के तहत हो चुका है समाधान
गौरतलब है कि SEFL और SIFL दोनों कंपनियां पहले ही कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा सफलतापूर्वक रिजॉल्व की जा चुकी हैं। अगस्त 2023 में NCLT ने नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके बाद कंपनियों के बोर्ड का पुनर्गठन किया गया।
इससे पहले, भारतीय रिजर्व बैंक ने गवर्नेंस में गंभीर खामियों और लगभग 28,000 करोड़ रुपये के रीपेमेंट डिफॉल्ट का हवाला देते हुए SIFL और SEFL के बोर्ड को भंग कर दिया था। अक्टूबर 2021 में इन कंपनियों को दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ा था।
शेयर बाजार में हल्की गिरावट
PNB ने यह जानकारी बाजार बंद होने के बाद साझा की। हालांकि, निवेशकों की सतर्क प्रतिक्रिया देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शुक्रवार को PNB का शेयर 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 120.25 रुपये पर बंद हुआ।
SREI ग्रुप का सफर और पतन
SREI ग्रुप की वेबसाइट के अनुसार, SREI इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस ने वर्ष 1989 में फाइनेंस सेक्टर में कदम रखा था। कंपनी खासतौर पर कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट फाइनेंसिंग के क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी मानी जाती थी। लेकिन समय के साथ बढ़ते कर्ज, कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और भुगतान चूक के चलते कंपनी को अंततः दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।
PNB की एसेट क्वालिटी पर नजर
PNB ने सितंबर तिमाही के अंत तक 643 करोड़ रुपये का प्रोविजन दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष और पिछली तिमाही दोनों की तुलना में अधिक है। बैंक का प्रोविजन कवरेज रेश्यो (तकनीकी राइट-ऑफ सहित) दूसरी तिमाही में बढ़कर 96.91 प्रतिशत हो गया, जो सालाना आधार पर 24 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी दर्शाता है। विश्लेषकों के लिए यह आंकड़ा बैंक की एसेट क्वालिटी को परखने का अहम संकेतक माना जाता है।
पुराने घोटालों की याद दिलाता मामला
यह खुलासा एक बार फिर PNB के उस बड़े बैंकिंग घोटाले की याद दिलाता है, जो वर्ष 2018 में मुंबई की ब्रैडी हाउस ब्रांच से सामने आया था। उस समय मशहूर ज्वैलर नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी पर लगभग 13,850 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा था। वह मामला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े फ्रॉड में शामिल किया जाता है।
PNB पुराने घावों से सबक लेते हुए नियामकीय पारदर्शिता और प्रावधानों पर जोर दे रहा है। हालांकि, बार-बार सामने आ रहे बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड देश के बैंकिंग सिस्टम के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।













