छुट्टियों के दौरान विशेष क्लास में बच्चों ने गीत, संगीत और नाटक के माध्यम से की नए वर्ष की शुरुआत
शहरी व ग्रामीण बच्चों का अदभुत समागम, लिटिल इप्टा के बच्चों ने अफ्रीकी लोककथा पर आधारित नाटक “लोहे का आदमी” का मंचन
संथाली लिपि ओलचिकी के 100 वर्ष पूरे, बच्चों ने मिलकर गए संताली गीत, हिन्दी गीतों से सीखी बराबरी व समानता की बात
घाटशिला / जमशेदपुर : भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस के मौके पर उमवि धातकीडीह में विशेष क्लास लगी। क्लास में विद्यालय के बच्चों के साथ साथ जमशेदपुर से लिटिल इप्टा के बच्चे भी विद्यालय पहुंचे। शहरी व ग्रामीण बच्चों का यह समागम बेहद प्रेरक था।

भारतीय जननाट्य संघ की अर्पिता ने सावित्रीबाई फुले जी के जन्मदिवस पर उमवि धातकीडीह के बच्चों को उनकी कहानी विस्तार से सुनाई। उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी, जिन्होंने उस समय में महिलाओं के शिक्षा के लिए प्रयास शुरू किया, जब समाज महिलाओं को शिक्षा देना जरूरी नहीं समझता था।

सावित्रीबाई फुले ने महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए स्कूल खोला, उनके वर्षों के संघर्ष का नतीजा है कि अब सैकड़ों वर्षों बाद लड़कियों को भी लड़कों की तरह पढ़ाई कर पाने के मौके मिलने शुरू हुए है।

इसके बाद लिटिल इप्टा के बाल रंगकर्मियों ने एक के बाद एक कई हिंदी जनवादी गीतों के माध्यम से पढ़ाई के महत्व को बतलाया, वही समाज में बराबरी और समानता लाने की अपील की, ताकि समाज में रह रहे, सभी बच्चों, महिलाओं और लोगों की मुश्किलें आसान हो पाए। संथाली लिपि ओलचिकी के 100 वर्ष पूरे होने पर संताल आदिवासी समुदाय में जश्न का माहौल है। विद्यालय और लिटिल इप्टा के बच्चों ने मिलकर कई संथाली गीत गाए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लिटिल इप्टा के बच्चों के द्वारा प्रस्तुत अफ्रीकी लोककथा पर आधारित नाटक “लोहे का आदमी” का मंचन रहा। लगभग 25 मिनट के नाटक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि असम्भव से दिखने वाले लक्ष्य को भी हासिल करने का रास्ता सामाजिक सूझबूझ से निकाला जा सकता है। बाल रंगकर्मी साहिल, दिव्या, नम्रता, गुंजन, अभिषेक नाग, सुरभि, सुजल, काव्या और श्रवण की प्रस्तुति देखते ही बनती थी। अफ्रीकी कथा का नाट्य रूपांतर, संगीत व निर्देशन अर्पिता ने किया है।

मौके पर उपस्थित उमवि धातकीडीह के प्रधानाध्यापक साजिद अहमद ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि लिटिल इप्टा के बच्चों को देखकर यह सहर्ष ही कहा जा सकता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। नया सीखने के लगातार जुनून और सही मार्गदर्शन से बच्चे काफी कुछ कर सकते है। प्रधानाध्यापक ने विद्यालय के बाल संसद के मंत्रिमंडल की प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों के नेतृत्व व सजगता से विद्यालय का नाम अब लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार हेतु नामित होने पर उन्होंने बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों व विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों का आभार प्रकट किया। मौके पर शिक्षक निखिल रंजन धावडिया, नव नियुक्त शिक्षक रूप कुमार, कलाकार बादल, अंजना, सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे। शीतकालीन छुट्टियों के बावजूद भी स्कूल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में लगभग 150 बच्चे व अभिभावक उपस्थित रहें, जो बेहद ही उत्साह वर्धक है।









