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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरक्षण का लाभ लेने वाले सामान्य श्रेणी में नहीं कर सकते दावा

On: January 7, 2026 3:18 PM
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण नीति से जुड़े एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाले मामले में केंद्र सरकार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण या रियायत का लाभ लेता है, तो वह बाद में सामान्य (जनरल) श्रेणी की सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, भले ही उसकी अंतिम मेरिट रैंक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार से बेहतर क्यों न हो।


यह फैसला भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2013 से जुड़े एक विवाद में आया है, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।


क्या है पूरा मामला


भारतीय वन सेवा परीक्षा 2013 तीन चरणों में आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी के लिए कटऑफ 267 अंक तय था, जबकि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए 233 अंक निर्धारित किए गए थे। अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार जी किरण ने रियायती कटऑफ का लाभ लेते हुए 247.18 अंक हासिल कर प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वहीं सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार एंटनी एस मारियप्पा ने 270.68 अंक प्राप्त कर बिना किसी छूट के जनरल कटऑफ पार किया। अंतिम परिणाम में जी किरण को 19वीं रैंक और एंटनी को 37वीं रैंक मिली।


कैडर आवंटन में कैसे हुआ विवाद


कैडर आवंटन के समय कर्नाटक राज्य में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी उपलब्ध थी, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कोई इनसाइडर सीट नहीं थी।


केंद्र सरकार ने नियमों के अनुसार जनरल इनसाइडर पोस्ट एंटनी एस मारियप्पा को दी, जबकि जी किरण को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया गया।


इस फैसले को जी किरण ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए केंद्र सरकार के आदेश को पलट दिया कि अंतिम मेरिट में जी किरण की रैंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से बेहतर है, इसलिए उसे जनरल कैडर दिया जाना चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द


केंद्र सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई शामिल थे, ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि यदि कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण या रियायत का लाभ उठाता है, तो वह भारतीय वन सेवा (नियुक्ति) नियम, 2013 के तहत सामान्य श्रेणी की सूची में शामिल नहीं हो सकता।


कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बाद के चरणों, मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सामान्य श्रेणी की सीट पर दावा करना नियमों के खिलाफ है।


फैसले का व्यापक असर


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आरक्षण नीति की व्याख्या के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यह निर्णय भविष्य में यूपीएससी और अन्य केंद्रीय सेवाओं की भर्ती प्रक्रियाओं में कटऑफ, मेरिट और कैडर आवंटन को लेकर स्पष्ट दिशा तय करेगा।


अदालत ने यह भी दोहराया कि जनरल श्रेणी कोई जाति आधारित श्रेणी नहीं, बल्कि बिना किसी छूट के प्राप्त मेरिट पर आधारित होती है, और इसमें वही उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं जिन्होंने परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ न लिया हो।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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