---Advertisement---

दवा लेते समय अब नहीं होगी उलझन, रैपर बताएगा एंटीबायोटिक है या नहीं

On: January 7, 2026 4:11 PM
---Advertisement---

नई दिल्ली: एंटीबायोटिक्स के बेहिसाब और गलत इस्तेमाल से पैदा हो रहे गंभीर खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार एक बड़ा और अहम कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार बाजार में बिकने वाली एंटीबायोटिक दवाओं की स्पष्ट पहचान के लिए एक नई सिस्टम लागू करने की योजना बना रही है, ताकि आम लोग आसानी से समझ सकें कि उन्हें दी जा रही दवा एंटीबायोटिक है या सामान्य पेनकिलर अथवा सपोर्टिव मेडिसिन।


इस उद्देश्य से सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को जरूरी गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव है कि एंटीबायोटिक दवाओं की पैकेजिंग पर खास कोडिंग, कलर इंडिकेटर या स्पष्ट निशान अनिवार्य रूप से दिए जाएं, ताकि मरीज और फार्मासिस्ट दोनों दवा की कैटेगरी को तुरंत पहचान सकें।


एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बना बड़ी चुनौती


स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यह फैसला एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया जा रहा है। बार-बार और बिना जरूरत एंटीबायोटिक्स लेने से बैक्टीरिया दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मामूली संक्रमण भी धीरे-धीरे जानलेवा बन सकता है।
फिलहाल बाजार में मौजूद दवाओं की पैकेजिंग से आम मरीज के लिए यह समझ पाना मुश्किल होता है कि कौन-सी दवा एंटीबायोटिक है और कौन-सी सामान्य दर्द निवारक या सपोर्टिव मेडिसिन। इसी भ्रम का फायदा उठाकर कई जगहों पर बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के एंटीबायोटिक्स बेची जा रही हैं, जो AMR को और बढ़ावा दे रही हैं।


पीएम मोदी ने जताई थी चिंता


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में एक बैठक के दौरान एंटीबायोटिक्स के बढ़ते और अनावश्यक इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल तभी करें, जब वास्तव में जरूरत हो।
प्रधानमंत्री ने दिल्ली की एक 80 वर्षीय महिला मरीज का उदाहरण भी साझा किया था, जिन पर दी गई 18 अलग-अलग एंटीबायोटिक्स में से किसी का भी असर नहीं हुआ। इसकी वजह यह थी कि लंबे समय तक और अत्यधिक एंटीबायोटिक्स लेने से महिला में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस विकसित हो गया था।


पैकेजिंग पर दिखेंगे नए संकेत


सरकार और CDSCO के बीच इस पहचान प्रणाली को लेकर कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं


• एंटीबायोटिक्स के लिए अलग रंग की पट्टी या बॉक्स


• पैकेजिंग पर स्पष्ट चेतावनी संदेश या खास सिंबल


• QR कोड, जिससे दवा की जानकारी स्कैन कर देखी जा सके


• दवा की श्रेणी पहचानने के लिए अल्फान्यूमेरिक कोड


इन सभी उपायों का मकसद मरीजों को ज्यादा जागरूक बनाना और उन्हें बिना जरूरत एंटीबायोटिक्स लेने से रोकना है।


राष्ट्रीय जागरूकता अभियान की तैयारी


सरकार इस पहल के साथ-साथ एंटीबायोटिक्स के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान भी शुरू करने जा रही है। इसके तहत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) को आम लोगों के लिए सरल और आसानी से समझ आने वाले संदेश तैयार करने को कहा गया है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में कई आम बीमारियों का इलाज भी बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सरकार की यह पहल न सिर्फ मरीजों के लिए बल्कि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

Join WhatsApp

Join Now