कठुआ (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच बुधवार शाम से भीषण मुठभेड़ जारी है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो से तीन आतंकियों के जंगल में घिरे होने की प्रबल आशंका है। आतंकियों को ढेर करने के लिए सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी से अभियान में जुटे हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह मुठभेड़ बिलावर के कहोग गांव स्थित कमाध नाले के पास घने जंगलों में शुरू हुई। सुरक्षाबलों को आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता खुफिया सूचना मिली थी, जिसके बाद विशेष अभियान समूह (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया।
तलाशी के दौरान खुद को घिरता देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर अचानक फायरिंग कर दी। इसके जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद मुठभेड़ ने गंभीर रूप ले लिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी मौके पर भेजा गया है।
रात का अंधेरा और घना जंगल अभियान में चुनौती जरूर बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षाबल आतंकियों को बेअसर करने के लिए डटे हुए हैं। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए सघन निगरानी रखी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जैश-ए-मोहम्मद के इन्हीं आतंकियों ने 26 मार्च 2025 को कठुआ क्षेत्र में घात लगाकर हमला किया था। इस आतंकी हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार बहादुर जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद से ही पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इन आतंकियों की तलाश में लगातार अभियान चला रही थीं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये आतंकी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने ठिकाने बदल रहे थे। बिलावर और आसपास के दुर्गम व घने जंगलों को उन्होंने सुरक्षित पनाहगाह बना लिया था। कई बार आतंकियों को रिहायशी इलाकों के नजदीक भी देखा गया, लेकिन हर बार वे पुलिस कार्रवाई से पहले जंगलों में ओझल हो जाते थे।
करीब नौ महीने के इंतजार और लगातार खुफिया प्रयासों के बाद आखिरकार सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। आज इन आतंकियों का आमना-सामना सुरक्षा बलों से हो गया है, जिससे इलाके में हलचल तेज हो गई है।
गौरतलब है कि कठुआ का बिलावर क्षेत्र अपनी घनी वनस्पति, पहाड़ी इलाकों और कठिन रास्तों के लिए जाना जाता है।
आतंकियों ने इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर लंबे समय तक खुद को छिपाए रखा। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और लगातार दबाव के चलते अब उनके बचने के रास्ते सीमित होते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल मुठभेड़ जारी है और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।














