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अमेरिका ने वेनेजुएला जा रहे रूसी तेल टैंकर को जब्त किया, दो हफ्ते पीछा कर दबोचा; दोनों देशों के बीच भारी तनाव

On: January 7, 2026 11:07 PM
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वाशिंगटन/माॅस्को: अमेरिका और रूस के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल लोड करने जा रहे दो टैंकरों को अलग-अलग समुद्री इलाकों में जब्त कर लिया। इनमें से एक टैंकर रूसी झंडे के तहत संचालित ‘मैरिनेरा’ है, जबकि दूसरा जहाज ‘सोफिया’ है, जिस पर पनामा का झंडा लगा हुआ था।


जानकारी के अनुसार, रूसी टैंकर मैरिनेरा को उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कब्जे में लिया, जबकि दूसरा जहाज कैरिबियन सागर में पकड़ा गया। दोनों टैंकरों को कुछ ही घंटों के अंतराल में रोका गया, जिससे यह साफ हो गया कि यह कार्रवाई पूर्व नियोजित थी।


दो हफ्तों से चल रही थी निगरानी


रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पिछले करीब दो हफ्तों से मैरिनेरा टैंकर पर नजर रखे हुए थीं। हवाई निगरानी, सैटेलाइट ट्रैकिंग और समुद्री गश्त के जरिए जहाज की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। अंततः अमेरिकी कोस्ट गार्ड का जहाज USCGC मुनरो इसे पकड़ने में सफल रहा।


रूस ने भेजे सबमरीन और युद्धपोत


अमेरिकी कार्रवाई की सूचना मिलते ही रूस ने अपने टैंकर की सुरक्षा के लिए सबमरीन और अन्य नौसैनिक जहाज क्षेत्र में तैनात कर दिए। हालांकि, किसी तरह की प्रत्यक्ष सैन्य झड़प नहीं हुई। रूसी मीडिया ने जहाज के आसपास उड़ते हेलिकॉप्टरों की तस्वीरें भी जारी की हैं, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


पहले भी विवादों में रहा है यह जहाज


जानकारी के मुताबिक, जिस टैंकर को अब मैरिनेरा के नाम से जाना जा रहा है, उसका पुराना नाम ‘बेला-1’ था। अमेरिका पहले ही इसे प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल कर चुका था। दिसंबर 2025 में यह जहाज वेनेजुएला की ओर बढ़ रहा था, लेकिन तब अमेरिकी कोस्ट गार्ड की कार्रवाई से चालक दल की सतर्कता के चलते यह बच निकलने में सफल रहा था।


उस वक्त यह जहाज गुयाना के झंडे के तहत पंजीकृत था और उस पर ईरानी तेल की ढुलाई का आरोप लगाया गया था। बाद में जहाज का नाम बदलकर मैरिनेरा कर दिया गया और इसे रूसी झंडे के तहत अस्थायी रूप से पंजीकृत किया गया।


रूस का कड़ा विरोध


रूसी परिवहन मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि किसी भी देश को दूसरे संप्रभु देश के पंजीकृत जहाज पर बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। रूस का दावा है कि 24 दिसंबर को इस जहाज को रूसी झंडे के तहत संचालन की वैध अनुमति दी गई थी।
रूस के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी बलों ने जहाज पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद टैंकर से सभी तरह का संचार पूरी तरह बंद हो गया।


ब्रिटेन की भी भूमिका


इस पूरे ऑपरेशन में ब्रिटेन द्वारा अमेरिका को तकनीकी और खुफिया सहयोग दिए जाने की बात भी सामने आई है। इससे यह मामला और अधिक अंतरराष्ट्रीय रूप ले चुका है।


कोल्ड वॉर के बाद सबसे बड़ा टकराव!


कोल्ड वॉर के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका और रूस सीधे तौर पर समुद्री स्तर पर आमने-सामने आए हैं। इस घटना ने हलचल मचा दी है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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