रांची: राजधानी रांची में एक सनसनीखेज ‘ब्लाइंड मर्डर केस’ का पुलिस ने आखिरकार खुलासा कर दिया है। करीब 11 महीनों की लंबी जांच, तकनीकी साक्ष्यों और सतत अनुसंधान के बाद पुलिस ने जीजा की हत्या कर उसे रेल दुर्घटना का रूप देने वाली साजिश का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
दरअसल, मृतक संजय उरांव की हत्या पूरी तरह से सुनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई थी। आरोपियों ने पहले उसकी चाकू मारकर निर्मम हत्या की और फिर शव को रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित अशोक नगर गेट नंबर-01 के पास रेलवे ट्रैक किनारे झाड़ियों में फेंक दिया, ताकि यह मामला एक सामान्य ट्रेन हादसा प्रतीत हो और पुलिस गुमराह हो जाए।
चार आरोपी गिरफ्तार, रिश्तों की उलझन बनी हत्या की वजह
पुलिस ने इस हत्याकांड में जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें विनोद उरांव (मृतक का साला), उसकी पत्नी राजमणि देवी, अमरदीप खालखो और अनुप उरांव शामिल हैं। सभी आरोपी गुमला जिले के बिशुनपुर थाना क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके पास से एक विवो और एक मोटोरोला कंपनी का स्मार्टफोन भी बरामद किया है, जिनकी जांच से कई अहम सुराग मिले।
रेल हादसा समझा गया था मामला
यह पूरा मामला 10 फरवरी 2025 को सामने आया, जब अरगोड़ा थाना क्षेत्र में रेलवे लाइन के किनारे एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ। प्रथम दृष्टया यह ट्रेन से कटकर हुई मौत का मामला प्रतीत हो रहा था। इसी आधार पर अरगोड़ा थाना कांड संख्या 29/2025 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी।
जांच आगे बढ़ने पर शव की पहचान गुमला निवासी संजय उरांव (पिता अकला उरांव) के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने जब मृतक के पारिवारिक और सामाजिक संबंधों की गहराई से पड़ताल की, तो कहानी ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया।
अवैध प्रेम संबंध से जन्मी साजिश
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि संजय उरांव का अपने ही साले की पत्नी, यानी सरहज राजमणि देवी के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। जब इस रिश्ते की भनक विनोद उरांव को लगी, तो घर में विवाद और तनाव बढ़ गया। पत्नी और जीजा के बीच संबंधों से आहत विनोद ने हत्या की साजिश रच डाली।
इस साजिश में विनोद की पत्नी राजमणि देवी भी शामिल हो गई। योजना के तहत विनोद ने अपने दो सहयोगियों अमरदीप खालखो और अनुप उरांव के साथ मिलकर संजय को धोखे से गुमला से रांची बुलाया। यहां अशोक नगर के पास रेलवे ट्रैक पर ले जाकर आरोपियों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
साक्ष्य मिटाने की कोशिश, लेकिन पुलिस ने तोड़ी साजिश
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को झाड़ियों में फेंक दिया, ताकि यह रेल दुर्घटना लगे और पुलिस किसी गहरी जांच में न जाए। हालांकि, पुलिस ने शुरुआती संदेह के आधार पर मामले की तह तक जाने का फैसला किया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के सहारे पुलिस ने एक-एक कड़ी जोड़ते हुए आखिरकार पूरे हत्याकांड की परतें खोल दीं।
11 महीने की कड़ी मेहनत के बाद पुलिस ने न सिर्फ हत्या की गुत्थी सुलझाई, बल्कि आरोपियों को गिरफ्तार कर कानून के शिकंजे में भी ले आई। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।














