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जमशेदपुर:बैंक में लाखों,कानूनी पेंच,पैसे के अभाव में सेवानिवृत शिक्षिका अंजलि बोस की मौत

On: January 9, 2026 9:05 PM
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प्रातः 10:00 बजे बैंक के अधिकारी पैसा लेकर पहुंचे अस्पताल लेकिन प्रातः 8:00 बजे ही हो गया था निधन
जमशेदपुर:सोनारी निवासी झारखंड सरकार की सेवानिवृत शिक्षिका अंजली बोस का आज तड़के एमजीएम अस्पताल में निधन हो गया । स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सोनारी शाखा में लाखों रुपए रहने के बावजूद भी अंजलि बोस के परिजन स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सोनारी शाखा के कानूनी दांव-पेंच के कारण अंजली बोस का इलाज बड़े अस्पताल में नहीं कर पाए ।

अंजली बोस की लाचार छोटी बहन गायत्री बोस ने बैंक से मदद नहीं मिलने पर बीते दिन भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को मामले की जानकारी देते हुए कहा था कि उनकी बड़ी बहन अंजली बोस 2008 में कपाली विद्यालय से सेवानिवृत हुई थी सेवानिवृत्ति के समय जितने पैसे मिले थे उसे सोनारी के स्टेट बैंक आफ इंडिया में जमा कर दिया था चुकी अंजलि अविवाहित थी इसलिए नॉमिनी में किसी का नाम उन्होंने नहीं लिखवाया था धीरे-धीरे उनकी तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दिया था लेकिन पैसा बैंक में था लेकिन पास नहीं था जिसके कारण समुचित इलाज नहीं हो पाया । अंजली बोस की तबीयत खराब की जानकारी दे देकर बैंक का चक्कर लगाते लगाते परिजन तक गए । लेकिन बैंक के अधिकारी और उनकी एक नहीं सुनी । अस्पताल पहुंचे विकास सिंह ने मामले की जानकारी सीधे उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को दिया । विकास सिंह के पहल पर उपायुक्त सीधे देर रात को ही स्वर्गीय अंजली बोस के परिजन एवं स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सोनारी शाखा से संपर्क साध कर मदद की पहल किया । आज प्रातः 10:00 बजे बैंक के सभी जिम्मेदार अधिकारी एमजीएम अस्पताल जाकर अंजली बोस की मदद में पहुंचे । लेकिन प्रातः 8:00 बजे ही अंजलि बोस का निधन हो गया था। अस्पताल पहुंचे बैंक के अधिकारीयों को परिजनों के गुस्से का दंश झेलना पड़ा बाद में अधिकारियों ने परिजनों से माफी मांगते हुए भविष्य में गलती नहीं दोहराने की बात कही।विकास सिंह ने कहा स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सोनारी शाखा के अधिकारियों ने जो कार्य आज करने का काम किया था यह काम अगर पहले कर दिए रहते तो अंजली बोस का निधन नहीं होता।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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