रांची: पारस एचइसी हॉस्पिटल ने अत्याधुनिक स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (SRS) और स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडियोथेरेपी (SBRT) सेवाओं की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इससे पहले यह तकनीक केवल बड़े महानगरों के चुनिंदा अस्पतालों में उपलब्ध थी।
अस्पताल में स्थापित उन्नत हैल्सियन रेडिएशन मशीन और इमेज-गाइडेड तकनीक (MRI एवं CT आधारित) ट्यूमर को मिलीमीटर सटीकता से निशाना बनाती है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कोई नुकसान नहीं होता।
पारस एचइसी हॉस्पिटल ने कैंसर उपचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए राज्य में पहली बार दो ब्रेन मेटास्टेसिस मरीजों का इलाज SRS तकनीक से सफलतापूर्वक किया। यह पूरी तरह बिना सर्जरी, बिना कट-टांके और न्यूनतम पीड़ा के साथ संपन्न हुआ।
डॉ. निशांत भारद्वाज ने बताया कि SRS तकनीक ब्रेन मेटास्टेसिस, मेनिंजियोमा, श्वान्नोमा/एकॉस्टिक न्यूरोमा, एवीएम, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसे मस्तिष्क रोगों में अत्यंत प्रभावी है। वहीं, SBRT शरीर के कई अंगों जैसे फेफड़े, लीवर, स्पाइन, प्रोस्टेट और पैंक्रियास के कैंसर उपचार में सफल सिद्ध हुई है।
डॉ. निशांत ने कहा कि पारंपरिक रेडियोथेरेपी में 25–30 सत्र लगते हैं, जबकि SRS और SBRT में केवल 1–5 सत्र में उपचार पूरा किया जा सकता है। इससे मरीजों का समय, खर्च और जोखिम तीनों में कमी आती है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जिनमें सर्जरी संभव नहीं या जोखिमपूर्ण हो।
पारस एचइसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नितेश कुमार ने कहा कि इस उपलब्धि से झारखंड के मरीजों को बड़े शहरों में इलाज कराने की मजबूरी से राहत मिली है और राज्य में कैंसर उपचार को नई दिशा मिली है।














