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झारखंड:नगर निकाय चुनाव को गवर्नर की हरी झंडी,चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, 641 प्रत्याशी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

On: January 13, 2026 2:01 PM
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जमशेदपुर:झारखंड में फरवरी में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। इसी बीच बड़ी खबर आ रही है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले इलेक्शन में खर्च का ब्योरा समय पर नहीं देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। इन उम्मीदवारों को नगर निकाय चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया गया है। यह लोग इस बार होने वाले नगर निकाय चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे। ऐसे लोगों की संख्या 641 है जिन्हें नगर निकाय चुनाव के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐसे प्रतिबंधित लोगों की सूची जारी कर संबंधित जिलों के पंचायती राज विभाग को भेज दी है।

राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार हर उम्मीदवार के लिए चुनाव खर्च का पूरा लेखा-जोखा जमा करना अनिवार्य होता है। आयोग का कहना है कि ऐसा न करना नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इससे चुनावी पारदर्शिता प्रभावित होती है। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है, जिससे कई पुराने और अनुभवी प्रत्याशी इस बार चुनावी मैदान से बाहर हो गए हैं।

कहां कितने लोग घोषित किए गए अयोग्य

आयोग की ओर से जारी सूची के मुताबिक सबसे अधिक 96 प्रत्याशी गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र से अयोग्य घोषित किए गए हैं। इसके बाद हजारीबाग नगर निगम से 81 और लोहरदगा नगर परिषद से 62 प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के अयोग्य पाया गया है।
साहिबगंज नगर परिषद में 45, छत्तरपुर नगर पंचायत और गोड्डा नगर परिषद में 44-44, मेदिनीनगर नगर निगम में 36, आदित्यपुर नगर निगम में 34, जबकि पाकुड़ और चतरा नगर परिषद से 30-30 प्रत्याशियों पर कार्रवाई की गई है। नगर पंचायत और नगर परिषद स्तर पर भी आयोग की सख्ती साफ दिखाई दी है। बरहरवा नगर पंचायत और गढ़वा नगर परिषद में 16-16, फुसरो नगर पंचायत और नगर ऊंटारी नगर पंचायत में 15-15, जबकि हुसैनाबाद नगर पंचायत में 11 प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित किया गया है।

इसके अलावा धनबाद नगर निगम, लातेहार नगर पंचायत, झुमरी तिलैया नगर परिषद और गुमला नगर परिषद से चार-चार, चिरकुंडा नगर परिषद, चाईबासा नगर परिषद और वासुकीनाथ नगर पंचायत से तीन-तीन, खूंटी और चाकुलिया नगर पंचायत से दो-दो, जबकि जामताड़ा नगर पंचायत से एक प्रत्याशी अयोग्य पाया गया है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खर्च का सही और समय पर हिसाब देना अनिवार्य है। आयोग ने संकेत दिया है कि आगे भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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